भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: जानें इसके पीछे के कारण
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का कारण
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी गई, जो बढ़ती तेल कीमतों, मध्य पूर्व में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और रुपये में भारी गिरावट के कारण वैश्विक बिकवाली का संकेत है। शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 2,400 अंक से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी 50 में 700 अंक से ज्यादा की कमी आई, जो सभी क्षेत्रों में व्यापक बिकवाली को दर्शाता है। यह गिरावट तब आई जब वैश्विक बाजारों में गिरावट आई और कच्चे तेल की कीमतें 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। आइए जानते हैं वे 5 प्रमुख कारण जिन्होंने बाजार को इस स्थिति में पहुंचाया:
मध्य पूर्व में युद्ध और तेल की कीमतों में वृद्धि
मार्केट क्रैश का सबसे बड़ा कारण ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध की स्थिति है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 25% बढ़कर $116 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 'होर्मुज स्ट्रेट' के माध्यम से दुनिया के 20% तेल व्यापार का रास्ता लगभग बंद हो गया है। इराक और कुवैत द्वारा उत्पादन में कटौती ने 'एनर्जी शॉक' के डर को वास्तविकता में बदल दिया है।
भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता
भारत अपनी आवश्यकताओं का 85% कच्चा तेल आयात करता है। मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, तेल की कीमतों में यह वृद्धि भारतीय GDP, करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई के लिए गंभीर खतरा है। जब तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल-डीजल से लेकर माल ढुलाई तक सभी चीजें महंगी हो जाती हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो जाती है।
रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों के पलायन ने भारतीय रुपये को कमजोर कर दिया है। रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 46 पैसे गिरकर 92.28 पर आ गई है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण रुपये की कीमत जल्द ही 93 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर सकती है। कमजोर रुपये से आयात महंगा हो जाता है, जिससे बाजार का माहौल बिगड़ गया है।
ग्लोबल मार्केट में मंदी का प्रभाव
भारतीय बाजार अकेला नहीं गिर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी गिरावट का माहौल है। सोमवार को एशियाई बाजारों की स्थिति निम्नलिखित रही: जापान का निक्केई 7% नीचे, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% नीचे, और ताइवान मार्केट 6% नीचे। जब वैश्विक बाजार गिरते हैं, तो निवेशक 'रिस्क-ऑफ' मोड में आ जाते हैं और भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकाल लेते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। पिछले शुक्रवार को ही FII ने ₹6,030 करोड़ के शेयर बेचे थे। विशेषज्ञ सुनील गुर्जर के अनुसार, निफ्टी ने अपना महत्वपूर्ण 200-दिन का मूविंग एवरेज तोड़ दिया है, जो एक लंबी मंदी का संकेत है।
भविष्य की संभावनाएं
मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,850 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है। यदि बाजार इससे नीचे टिकता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे 'पकड़ो और देखो' की नीति अपनाएं और किसी भी बड़े निवेश से पहले भू-राजनीतिक स्थितियों के सामान्य होने का इंतजार करें।
