भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट
नई दिल्ली: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सामना करना पड़ा, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया। कारोबार के दूसरे हिस्से में अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। कमजोर आईटी शेयरों, वैश्विक संकेतों में कमी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी बयानों और विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
टेक्नोलॉजी शेयरों का गिरावट में योगदान
गिरावट में टेक्नोलॉजी शेयरों का सबसे बड़ा योगदान रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत गिर गया, और इसके सभी शेयर नुकसान में बंद हुए। तिमाही नतीजों की कमजोर शुरुआत ने मुनाफे में सुधार को लेकर चिंता बढ़ा दी है, विशेषकर आईटी जैसे निर्यात आधारित क्षेत्रों में सुस्ती के संकेत मिले हैं। निवेशक अब ऑटो सेक्टर के नतीजों से कुछ राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
वैश्विक संकेतों का प्रभाव
वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई बेचैनी
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी नकारात्मक संकेत प्राप्त हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी ने वैश्विक व्यापार तनाव को फिर से उभारा। एशिया प्रशांत बाजारों में कमजोरी देखी गई और अमेरिकी शेयर वायदा भी गिर गए। इसके अलावा, अमेरिकी बॉंड यील्ड के ऊंचे स्तर पर पहुंचने से ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका बढ़ गई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना रहा। एफआईआई ने लगातार दसवें सत्र में शेयर बेचे और एक ही दिन में लगभग 3,263 करोड़ रुपये की निकासी की। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ खरीदारी की, लेकिन वह गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
सुरक्षित निवेश की ओर रुझान
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा रुझान
बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी गई। निवेशक तेजी से सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़े, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बनी रही। बढ़ते व्यापार तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने इस रुझान को मजबूत किया।
निवेशकों की संपत्ति में कमी
निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका
तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। एक ही दिन में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये का बाजार मूल्य साफ हो गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक टैरिफ विवाद और नीतिगत संकेतों पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
