Newzfatafatlogo

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में महत्वपूर्ण गिरावट आई। निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर घरेलू नतीजों के कारण। इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को भी प्रभावित किया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
 | 
भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं

भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर


बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। सेंसेक्स ने इंट्राडे में 1000 अंकों से अधिक की गिरावट देखी, जबकि निफ्टी 50 अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार 25000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। इस गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। सेंसेक्स 1056 अंक गिरकर 81124 के निचले स्तर पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी लगभग 1.2 प्रतिशत गिरकर 24920 तक पहुंच गया। इस बिकवाली के कारण बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 449.76 लाख करोड़ रुपये रह गया, जिससे निवेशकों की लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति समाप्त हो गई।


बाजार पर दबाव के कारण

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाजार कई दबावों का सामना कर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर घरेलू आय, गिरता रुपया और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने माहौल को और नकारात्मक बना दिया है.


ग्लोबल टेंशन का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और यूरोप के खिलाफ नए टैरिफ की धमकियों ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। निवेशकों को एक नए ट्रेड वॉर की आशंका सताने लगी है।


एशियाई बाजारों में भी लगातार तीसरे दिन गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई पांचवें सत्र में भी गिर गया। वॉल स्ट्रीट में भी एक रात पहले बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। इस वैश्विक दबाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा।


बड़ी कंपनियों के नतीजों का प्रभाव

घरेलू स्तर पर भी स्थिति बेहतर नहीं रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े नामों के नतीजों ने निवेशकों को निराश किया। इससे यह डर बढ़ गया कि ऊंचे वैल्यूएशन अब फंडामेंटल्स से आगे निकल चुके हैं।


आईटी सेक्टर में भी दबाव देखा गया और आईटी इंडेक्स लगभग 1 प्रतिशत गिर गया। कई ब्रोकरेज हाउस ने आउटलुक को लेकर सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार की चौड़ाई और कमजोर हो गई।


रुपये की गिरावट

भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपये ने इक्विटी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। इस महीने रुपये में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि 2025 में अब तक इसमें लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई है।


गिरते रुपये से आयातित महंगाई और विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने किसी एक स्तर को बचाने के बजाय अस्थिरता कम करने के लिए सीमित हस्तक्षेप किया।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार ग्यारहवें सत्र में भी शुद्ध विक्रेता बने रहे। 20 जनवरी को FIIs ने लगभग 2938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक जोखिम से दूरी बनाए हुए हैं।


हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ खरीदारी की, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। विदेशी आउटफ्लो ही बाजार की दिशा तय करता नजर आया।


टेक्निकल संकेत

टेक्निकल रूप से भी बाजार का ढांचा कमजोर हुआ है। निफ्टी और सेंसेक्स ने अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक निफ्टी 25500 के नीचे रहेगा, तब तक दबाव बना रह सकता है और आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि ओवरसोल्ड स्थिति के कारण बीच-बीच में हल्की रिकवरी आ सकती है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड अभी भी नकारात्मक बना हुआ है।


निवेशकों की चिंताएं

कुल मिलाकर, आज का मार्केट क्रैश इस बात का संकेत है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। वैश्विक संकेत, कमजोर नतीजे और विदेशी बिकवाली जब तक थमती नहीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।