भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों को 11 लाख करोड़ का नुकसान
भारतीय शेयर बाजार में संकट का दिन
मंगलवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की दो बार की अपील ने बाजार में भारी गिरावट का कारण बना। इस कारण सेंसेक्स में 1500 अंकों की गिरावट आई, जबकि निफ्टी भी 400 अंकों से अधिक टूटकर बंद हुआ। इस दिन निवेशकों की संपत्ति में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
बिकवाली का माहौल
शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों में बेचैनी देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 1456 अंकों की गिरावट के साथ 74,559 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 436 अंकों की कमी के साथ 23,380 पर पहुंच गया। पूरे दिन बाजार में दबाव बना रहा और लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। आईटी और टेक कंपनियों पर सबसे अधिक असर पड़ा, जहां टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट आई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई।
निवेशकों को हुआ बड़ा नुकसान
इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई का कुल मार्केट कैप 467 लाख करोड़ रुपये से घटकर 456 लाख करोड़ रुपये रह गया। एक ही दिन में निवेशकों के लगभग 11 लाख करोड़ रुपये खत्म हो गए। निवेशकों में चिंता इस बात को लेकर है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ता है, तो विदेशी निवेश में कमी आ सकती है। यह घबराहट छोटे निवेशकों में स्पष्ट रूप से देखी गई।
PM मोदी की अपील का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच बेंगलुरु स्थित रियल एस्टेट और ज्वेलरी स्टॉक्स में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। यह स्थिति प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील के बाद बनी, जिसमें उन्होंने भारतीयों से अगले एक साल तक सोना न खरीदने और घर से काम करने का आग्रह किया।
युद्ध की आशंका का असर
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। कच्चे तेल की महंगाई से महंगाई बढ़ने और कंपनियों के खर्च में वृद्धि की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान ने भी बाजार में बेचैनी बढ़ा दी, जिससे निवेशकों में डर और बढ़ गया।
रुपये की गिरावट
शेयर बाजार की कमजोरी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया 35 पैसे गिरकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।
