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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता का माहौल

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जो पिछले चार महीनों की सबसे बड़ी एक-दिनी गिरावट है। निफ्टी और सेंसेक्स में क्रमशः 1.7 और 1.8 प्रतिशत की कमी आई है। सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए हैं, और निर्यात आधारित कंपनियों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। अमेरिकी टैरिफ की चिंताओं और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता का माहौल

बाजार में गिरावट के संकेत

भारतीय शेयर बाजार ने कमजोरी के संकेतों के साथ शुरुआत की, और जल्द ही दबाव बढ़ता गया। अमेरिकी टैरिफ के बारे में बढ़ती अनिश्चितता और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों में बिकवाली के कारण गुरुवार को बाजार में पिछले चार महीनों की सबसे बड़ी एक-दिनी गिरावट देखी गई। निफ्टी-50 लगभग एक प्रतिशत गिरकर 25,876.85 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.92 प्रतिशत की कमी के साथ 84,180.96 पर पहुंच गया। इस हफ्ते निफ्टी और सेंसेक्स क्रमशः 1.7 और 1.8 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।


सभी सेक्टर्स पर असर

यह गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए हैं, और मिड-कैप तथा स्मॉल-कैप शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है, जिसमें जनवरी में लगभग 90 करोड़ डॉलर की बिकवाली हुई है।


रुपये पर दबाव

रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। टैरिफ की चिंताओं और पूंजी के निरंतर बाहर जाने से रुपये में कमजोरी आई है, हालांकि रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप ने गिरावट को कुछ हद तक रोकने का प्रयास किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक वैश्विक संकेतों, विशेषकर अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर चिंतित हैं।


अमेरिकी व्यापार नीति का प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने के संकेत और भारत को उच्च शुल्क की चेतावनी ने चिंता को और बढ़ा दिया है। अमेरिका पहले ही भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा चुका है, जबकि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है।


सेक्टोरल विश्लेषण

सेक्टोरल स्तर पर निर्यात आधारित कंपनियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। परिधान और सीफूड निर्यातक शेयरों में 7 से 9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। मेटल शेयरों में भी वैश्विक तेजी के कमजोर पड़ने से नौ महीनों की सबसे बड़ी एक-दिनी गिरावट आई है। तेल एवं गैस क्षेत्र में भी बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लगभग 2 प्रतिशत गिर गया। आईटी शेयरों में हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली हुई है, जबकि एलएंडटी और बीएचईएल जैसे कैपिटल गुड्स शेयरों में तेज गिरावट आई है, जहां सरकारी नीतियों में बदलाव की अटकलों का असर स्पष्ट है।