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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में तूफानी बिकवाली

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये चंद पलों में ही गायब हो गए। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के विफल होने के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बन गया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण, जैसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। क्या यह स्थिति आगे भी जारी रहेगी? पढ़ें पूरी जानकारी के लिए।
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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में तूफानी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर


सोमवार की सुबह जैसे ही भारतीय शेयर बाजार खुला, इसमें भारी गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी में तेज बिकवाली हुई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये चंद पलों में ही गायब हो गए। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के विफल होने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बन गया है।


सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स में 1400 अंकों से अधिक की गिरावट आई, जबकि निफ्टी में भी गिरावट का सामना करना पड़ा। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय बाजार के माहौल को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है, जिसके कारण लगभग सभी सेक्टर के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।


बाजार में हाहाकार

सुबह 9:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,446 अंकों की गिरावट के साथ 76,103 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 373 अंकों की गिरावट के साथ 23,677 पर खुला। प्री-ओपन सेशन में स्थिति और भी खराब थी, जहां सेंसेक्स 1600 अंकों तक नीचे चला गया था।


गिरावट का कारण

इस गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। इसके तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की योजना की घोषणा की। इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित नए हमलों की खबरों ने भी बाजार में घबराहट बढ़ा दी।


कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वैश्विक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) 104.24 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि इससे इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा और रुपये में और कमजोरी आ सकती है। इसी डर से विदेशी निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी।


एशियाई बाजारों की स्थिति

केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग 1 प्रतिशत के आसपास की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स (S&P 500 और डॉव जोन्स) भी करीब 0.80 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी ने सुबह से ही भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक संकेत दे दिए थे।