मनीष सिसोदिया की नई वीडियो सीरीज: शिक्षा में वैश्विक दृष्टिकोण

शिक्षा में बदलाव की दिशा में एक नई पहल
आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भारत की शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए एक नई वीडियो श्रृंखला की शुरुआत की है। इस श्रृंखला का नाम "दुनिया की शिक्षा व्यवस्था और भारत" है, जिसका उद्देश्य लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे अपने बच्चों के लिए सही शिक्षा का चुनाव कर सकें। पहले एपिसोड में, सिसोदिया ने जापान, सिंगापुर, चीन, कनाडा और फिनलैंड के शिक्षा मॉडल की चर्चा की। उन्होंने बताया कि सिंगापुर, जो भारत की आजादी के 18 साल बाद स्वतंत्र हुआ, आज शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अमीर देशों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत में बदलाव तभी संभव है जब शिक्षा में बदलाव आएगा, और यह बदलाव नेताओं की सोच पर निर्भर करता है।
शिक्षा का अधिकार और जिम्मेदारी
सिसोदिया ने बताया कि 150 साल पहले, 1872 में जापान ने कानून बनाया कि हर बच्चे को शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। भारत ने 2011 में "शिक्षा का अधिकार" अधिनियम लागू किया। उन्होंने जापान की शिक्षा प्रणाली की प्रशंसा की, जिसने देश को परमाणु हमले के बाद भी मजबूती से खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जापान में बच्चे "मैं" नहीं, "हम" सीखते हैं, और उनकी शिक्षा प्रणाली में टीमवर्क और जिम्मेदारी का महत्व है।
सिंगापुर और चीन की शिक्षा प्रणाली
सिसोदिया ने सिंगापुर के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के पहले प्रधानमंत्री ने शिक्षा को प्राथमिकता दी, जिससे देश ने तेजी से विकास किया। उन्होंने चीन की शिक्षा प्रणाली की भी चर्चा की, जिसमें मेहनत को प्राथमिकता दी जाती है। चीन में बच्चों को मेहनत के महत्व का पाठ पढ़ाया जाता है, और अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
कनाडा और फिनलैंड के शिक्षा मॉडल
कनाडा की शिक्षा प्रणाली में विविधता को अवसर माना जाता है, और संसद शिक्षा के लक्ष्यों को निर्धारित करती है। वहीं, फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली ने दशकों से शीर्ष स्थान बनाए रखा है। सिसोदिया ने बताया कि फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य सोचने और समझने की क्षमता विकसित करना है, न कि केवल अंक प्राप्त करना।
भारत के लिए शिक्षा का भविष्य
सिसोदिया ने अंत में सवाल उठाया कि भारत किस शिक्षा मॉडल को अपनाएगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने शिक्षकों पर भरोसा करना होगा और शिक्षा में निवेश करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमें जापान या सिंगापुर की नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार एक नया मॉडल विकसित करना चाहिए।