मारुति सुजुकी ने पेश की वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल कार, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा
मारुति सुजुकी ने अपनी नई वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल कार का उत्पादन संस्करण पेश किया है, जो 85% एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने में सक्षम है। यह कदम भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रयासरत है, और इस तकनीक के व्यापक उपयोग के लिए ई-85 ईंधन वितरण केंद्रों की स्थापना की योजना है। जानें इस नई कार की विशेषताएँ और इसके भविष्य की संभावनाएँ।
| Jun 4, 2026, 19:19 IST
मारुति सुजुकी की नई फ्लेक्स फ्यूल कार
भारत में वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी बहुप्रतीक्षित वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल कार का उत्पादन संस्करण आधिकारिक तौर पर पेश किया है। इससे पहले, कंपनी इस वाहन के प्रोटोटाइप को दो बार प्रदर्शित कर चुकी थी, लेकिन अब यह उत्पादन के लिए तैयार है।
यह कार 85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए डिज़ाइन की गई है। हालांकि, कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है और इसे फिलहाल केवल व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है। उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक आम उपभोक्ताओं के लिए भी उपलब्ध हो सकती है।
केंद्र सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच, एथेनॉल आधारित ईंधन को भविष्य का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
जानकारी के अनुसार, मारुति सुजुकी देश की पहली वाहन निर्माता कंपनी बन गई है जिसने फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाले वाहन को उत्पादन स्तर तक पहुंचाया है। इससे पहले, टोयोटा ने 2022 में कोरोला फ्लेक्स फ्यूल मॉडल और बाद में इनोवा हाईक्रॉस फ्लेक्स फ्यूल मॉडल का प्रदर्शन किया था। टाटा मोटर्स ने भी भारत मोबिलिटी प्रदर्शनी 2024 में पंच फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को प्रदर्शित किया था।
वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल पहली बार 2022 में सामने आई थी और इसे भारत मोबिलिटी प्रदर्शनी 2024 में भी दिखाया गया था। यह तकनीकी रूप से ई-100 मानक के अनुरूप तैयार की गई है, हालांकि इसे ई-85 ईंधन पर चलाने के लिए प्रमाणित किया गया है। सरल शब्दों में, यह वाहन ई-20 से लेकर ई-100 तक किसी भी अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चल सकता है।
इस कार में मारुति सुजुकी का लोकप्रिय 1.2 लीटर चार सिलेंडर इंजन लगाया गया है। हालांकि, एथेनॉल आधारित ईंधन के अनुरूप बनाने के लिए इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जैसे उन्नत ईंधन इंजेक्टर, नई ईंधन पंप प्रणाली, विशेष ईंधन पाइप, नया इंजन नियंत्रण तंत्र और एथेनॉल की मात्रा पहचानने वाला विशेष सेंसर। कंपनी ने अभी तक वाहन की शक्ति और ईंधन दक्षता से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए हैं।
इस तकनीक के व्यापक उपयोग की सबसे बड़ी चुनौती एथेनॉल मिश्रित ईंधन की उपलब्धता है। वर्तमान में, ऐसे ईंधन की आपूर्ति सीमित है और इसके लिए अलग वितरण व्यवस्था और भंडारण सुविधाओं की आवश्यकता होगी।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि 2027 के अंत तक देशभर में लगभग 5,000 ई-85 ईंधन वितरण केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है। शुरुआत में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, पुणे और नागपुर मार्ग पर 50 से 100 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद इस वर्ष के अंत तक इनकी संख्या 500 तक पहुंचाने की योजना है। सरकार का दावा है कि ई-85 ईंधन की कीमत वर्तमान ई-20 पेट्रोल की तुलना में काफी कम होगी। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारतीय वाहन बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती है।
