Newzfatafatlogo

मिडिल ईस्ट संघर्ष से वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक शेयर बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों में ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। भारत में निफ्टी और सेंसेक्स में भी भारी गिरावट आई है, जिससे रिटेल निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। इस लेख में जानें कि कैसे यह संघर्ष न केवल बाजार को बल्कि आम आदमी की आय को भी प्रभावित कर रहा है और भविष्य में निवेशकों को क्या करना चाहिए।
 | 
मिडिल ईस्ट संघर्ष से वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट

शेयर बाजारों में उथल-पुथल


मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक शेयर बाजारों को हिला कर रख दिया है। अमेरिका, चीन और जापान जैसे प्रमुख देशों में ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। भारत में भी सोमवार को भारी गिरावट देखी गई, जहां निफ्टी 22500 अंक तक गिर गया। पिछले तीन हफ्तों से बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और निवेशकों का विश्वास कमजोर कर दिया है। रिटेल निवेशक अब चिंतित हैं, क्योंकि इस संघर्ष ने न केवल बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि आम आदमी की आय पर भी असर डाला है।


वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट

अमेरिकी शेयर बाजार में एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। डॉउ जोन्स में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। जापान के निक्केई 225 में 12 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जिससे 60-70 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। चीन के हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 8 प्रतिशत गिर गए हैं, जहां कुल नुकसान 100 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। इस संघर्ष ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है।


भारतीय बाजार पर गहरा असर

भारत में सोमवार को निफ्टी 2.50 प्रतिशत गिरकर 22500 अंक के नीचे आ गया। पिछले तीन हफ्तों में निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। जनवरी में निफ्टी 26373 के रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन अब यह 15 प्रतिशत नीचे है। बीएसई का मार्केट कैप 463 लाख करोड़ से घटकर 414 लाख करोड़ रुपये रह गया है, यानी महज 25 दिनों में 50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


रिटेल निवेशकों की मुश्किलें

देश में 22 करोड़ डीमैट अकाउंट्स हैं और करोड़ों लोग म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से बाजार से जुड़े हुए हैं। पिछले 3-4 वर्षों में नए निवेशकों के पोर्टफोलियो अब 25-30 प्रतिशत तक घाटे में हैं। कई निवेशकों का 15-20 प्रतिशत मुनाफा समाप्त हो गया है और उनकी पूंजी भी प्रभावित हुई है। कोविड के बाद बाजार में आई तेजी अब इस संघर्ष के कारण रुक गई है, जिससे निवेशकों में हाहाकार मचा हुआ है।


भविष्य के लिए सलाह

इतिहास से पता चलता है कि युद्ध या संकट के समय बाजार में तेज गिरावट आती है, लेकिन कुछ महीनों बाद यह संभल जाता है। लंबे समय के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। नए निवेश के लिए ब्लूचिप कंपनियों में सीमित राशि लगाना बेहतर होगा। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय तनाव जारी है, इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है, लेकिन स्थिति सामान्य होने पर रिकवरी भी तेज होगी।