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यूरोप में बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती

यूरोप में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती बढ़ रही है। मेटा प्लेटफॉर्म्स पर आरोप है कि वह कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा में असफल रही है। यूरोपीय आयोग ने डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। जानें इस मामले में मेटा का क्या कहना है और आगे की संभावनाएं क्या हैं।
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यूरोप में बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती

सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा

आजकल बच्चों का झुकाव सोशल मीडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। हाल ही में यूरोप से एक महत्वपूर्ण खबर आई है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.


मेटा प्लेटफॉर्म्स पर आरोप

यूरोपीय संघ ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर यह आरोप लगाया है कि वह कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है। कंपनी के नियमों के अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर खाता बनाने की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में नाबालिग इन प्लेटफार्मों का उपयोग कर रहे हैं.


यूरोपीय आयोग की जांच

यूरोपीय आयोग की जांच में यह पाया गया है कि मेटा के पास ऐसे प्रभावी उपाय नहीं हैं जो 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खाता बनाने से रोक सकें। इसके अलावा, जिन बच्चों ने खाता बना लिया है, उन्हें पहचानने और हटाने की प्रक्रिया भी कमजोर बताई गई है. आयोग ने यह भी कहा है कि कंपनी यह सुनिश्चित करने में पीछे है कि बच्चों को इन प्लेटफार्मों पर सुरक्षित अनुभव मिल रहा है या नहीं.


डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई

इस मामले में यूरोपीय संघ ने डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है, जो तकनीकी कंपनियों को अपने प्लेटफार्मों पर उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश देता है.


कंपनी का जवाब

हालांकि, मेटा ने इन आरोपों का खंडन किया है। कंपनी का कहना है कि वह कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान करने और उनके खातों को हटाने के लिए कई कदम उठा रही है। मेटा ने यह भी स्वीकार किया है कि उम्र की सही पहचान करना पूरे उद्योग के लिए एक चुनौती है और इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है.


आगे की कार्रवाई

मौजूदा जानकारी के अनुसार, कंपनी को इन प्रारंभिक निष्कर्षों पर जवाब देने का अवसर दिया गया है, जिसके बाद यूरोपीय आयोग अंतिम निर्णय करेगा। यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो कंपनी पर उसके वैश्विक सालाना कारोबार का छह प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है.


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश है और भविष्य में अन्य तकनीकी कंपनियों पर भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा आगे क्या कदम उठाती है और क्या वह इन नियमों के अनुसार खुद को ढाल पाती है.