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राज्यसभा में राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा के मुद्दे पर उठाई आवाज़

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर 'डेली डेटा लिमिट' वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जिससे उपभोक्ता का डेटा समाप्त हो जाता है। चड्ढा ने सुझाव दिया कि उपयोगकर्ताओं को डेटा कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा दी जाए और अनयूज्ड डेटा को ट्रांसफर करने की अनुमति होनी चाहिए। उनका यह बयान उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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राज्यसभा में राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा के मुद्दे पर उठाई आवाज़

मोबाइल डेटा की लूट पर सवाल

नई दिल्ली - राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स प्रतिदिन डेटा प्लान के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से लूटे जा रहे हैं।


सोमवार को इस विषय पर चर्चा करते हुए, उन्होंने इसे उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। चड्ढा ने विस्तार से समझाया कि जब कोई उपयोगकर्ता अपना मोबाइल रिचार्ज करता है, तो उसे उसके प्लान के अनुसार प्रतिदिन 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। यह डेटा ‘डेली लिमिट’ के रूप में होता है, जो हर रात 12 बजे समाप्त हो जाता है। यदि उस दिन का पूरा डेटा उपयोग नहीं किया गया, तो बचे हुए डेटा का कोई उपयोग नहीं होता और वह समाप्त हो जाता है।


राज्यसभा में बोलते हुए, उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा के लिए भुगतान करता है, तो उसे पूरा डेटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। उन्होंने एक उदाहरण देकर इसे स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने महीने की शुरुआत में अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरा और महीने के अंत तक केवल 15 लीटर का उपयोग किया, तो क्या पेट्रोल पंप वाला बचा हुआ 5 लीटर वापस ले लेगा? इसका उत्तर है, नहीं, क्योंकि उपभोक्ता ने पूरे 20 लीटर का भुगतान किया है। इसी तरह, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए और इसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।


सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जबकि ‘मंथली डेटा लिमिट’ वाले प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं। उनका तर्क था कि यदि मासिक डेटा सीमा होती, तो उपभोक्ता पूरे महीने में अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम डेटा का उपयोग कर सकता है, जिससे कंपनियों को कम लाभ होता। यही कारण है कि कंपनियां दैनिक सीमा वाले प्लान को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इसे उन्होंने ‘डिजिटल ऑक्सीजन’ बताया।


उन्होंने कहा कि शिक्षा, कामकाज, बैंकिंग और संचार जैसे क्षेत्रों में इंटरनेट की आवश्यकता है। ऐसे में रोजाना लाखों जीबी डेटा का उपयोग न होने के बावजूद समाप्त होना एक गंभीर चिंता का विषय है। राघव चड्ढा ने इसके समाधान के लिए तीन सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि हर उपयोगकर्ता को डेटा कैरी फॉरवर्ड की सुविधा दी जाए, ताकि दिन के अंत में जो डेटा बच जाए, वह अगले दिन के डेटा में जुड़ जाए।


दूसरा, यदि महीने के अंत में काफी मात्रा में डेटा बचता है, तो उपयोगकर्ता को यह विकल्प दिया जाए कि वह उस अनयूज्ड डेटा की वैल्यू को अगले रिचार्ज में समायोजित कर सके। तीसरा, अनयूज्ड डेटा को डिजिटल एसेट माना जाए और उसे ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाए। सांसद ने कहा कि यह मुद्दा अब केवल डेटा का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल न्याय का है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाए, ताकि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को उनका हक मिल सके।