रॉबर्ट कियोसाकी की चेतावनी: 2026 में शेयर बाजार में गिरावट की संभावना
भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता
दुनिया के विभिन्न बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और ब्याज दरों के प्रति अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इस संदर्भ में, प्रसिद्ध निवेशक और 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वर्ष 2026 में शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने भविष्यवक्ताओं जैसे नास्त्रेदमस और एडगर कैस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भविष्यवाणियां सच भी हो सकती हैं और नहीं भी, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
संकट में अवसरों की खोज
कियोसाकी का मानना है कि बाजार में गिरावट को केवल नुकसान के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, जब बाजार में गिरावट आती है, तो असली संपत्तियां सस्ती हो जाती हैं, और समझदार निवेशक उन्हें खरीदकर अमीर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले से तैयारी कर लेंगे, वे मंदी के बाद मजबूत स्थिति में होंगे। पारंपरिक निवेश पर निर्भर रहने वाले निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
वास्तविक संपत्तियों का महत्व
कियोसाकी ने स्पष्ट किया कि वे खुद स्टॉक, बॉंड या ईटीएफ में निवेश नहीं करते। उनका निवेश रियल एस्टेट, तेल, खाद्य उत्पादन, सोना, चांदी, बिटकॉइन और एथेरियम जैसी वास्तविक संपत्तियों पर आधारित है। उनका तर्क है कि जब सरकारें अधिक पैसा छापती हैं, तो कागजी संपत्तियों की कीमत घट जाती है। ऐसे में जिन चीजों की आपूर्ति बढ़ाई नहीं जा सकती, वे सुरक्षित मानी जाती हैं।
धैर्य और अनुशासन की आवश्यकता
कियोसाकी ने अपने निवेश के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनकी संपत्ति रातों-रात नहीं बनी। उन्होंने छोटी-छोटी संपत्तियां खरीदीं और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखा। उन्होंने बिटकॉइन खरीदने का अनुभव साझा किया, जब उन्होंने अपना अधिकांश पैसा लगाकर पहली बार बिटकॉइन खरीदा था और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उसे बेचा नहीं। उनका कहना है कि सही समय देखने से ज्यादा महत्वपूर्ण धैर्य और अनुशासन है।
तैयारी ही सबसे बड़ी रणनीति
कियोसाकी ने वॉरेन बफे का उदाहरण देते हुए कहा कि दिग्गज निवेशक भी मंदी का इंतजार करते हैं ताकि वे सस्ते में संपत्तियां खरीद सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक संकट और मंदी की आशंका के बीच निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि बाजार गिरेगा या नहीं, बल्कि यह है कि यदि गिरावट आती है, तो क्या वे इसके लिए तैयार हैं।
