विदेशी निवेशकों की सतर्कता: भारतीय शेयर बाजार में निकासी का सिलसिला जारी
विदेशी निवेशकों का रुख
इस साल की शुरुआत में विदेशी निवेशकों का रुख थोड़ा सावधानी भरा दिखाई दे रहा है। जनवरी के पहले दो कारोबारी सत्रों में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 7,608 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, यह दर्शाता है कि एफपीआई नए साल की शुरुआत में जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिससे निकट भविष्य में बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है.
बिकवाली का सिलसिला
यह बिकवाली का क्रम पिछले वर्ष से जारी है। 2025 में, विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए थे। उस समय रुपये में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार तनाव, संभावित अमेरिकी टैरिफ का डर और शेयर बाजार के ऊंचे मूल्यांकन जैसी चिंताएं इस बड़े आउटफ्लो के प्रमुख कारण बने थे.
रुपये पर असर
एफपीआई की निरंतर बिकवाली का प्रभाव रुपये पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 2025 के दौरान, डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग पांच प्रतिशत तक कमजोर हुआ था। जब विदेशी निवेशक पैसे निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है.
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिकेगी। वर्तमान जानकारी के अनुसार, 2026 में विदेशी निवेश रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि मजबूत जीडीपी ग्रोथ और कॉरपोरेट आय में संभावित सुधार आने वाले महीनों में विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकते हैं.
विशेषज्ञों की राय
एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान भी इसी विचार से सहमत हैं। उनके अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में स्थिरता, वैश्विक ब्याज दरों का अनुकूल माहौल और डॉलर-रुपया विनिमय दर में संतुलन विदेशी निवेशकों के लिए बेहतर पृष्ठभूमि बना सकता है। इसके अलावा, पिछले वर्ष की तुलना में अब इक्विटी वैल्यूएशन भी कुछ हद तक सहज नजर आ रहे हैं, जो निवेश की वापसी में मदद कर सकते हैं.
एफपीआई प्रवाह की स्थिति
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि जनवरी में एफपीआई का सतर्क रहना कोई नई बात नहीं है। पिछले दस वर्षों में से आठ बार विदेशी निवेशकों ने साल के पहले महीने में शुद्ध बिकवाली की है। वर्तमान में, एफपीआई प्रवाह वैश्विक संकेतों और मैक्रोइकॉनॉमिक हालात पर निर्भर करेगा, लेकिन मूल्यांकन को लेकर पहले जैसी चिंता कम होने से आगे के महीनों में सुधार की उम्मीद बनी हुई है.
