शेयर मार्केट में फ्री फ्लोट मार्केट कैप का महत्व
फ्री फ्लोट मार्केट कैप क्या है?
जब हम शेयर बाजार में किसी कंपनी के आकार और मूल्य का आकलन करते हैं, तो अक्सर 'टोटल मार्केट कैप' की चर्चा होती है। यह वास्तव में दर्शाता है कि बाजार में कितने शेयर खरीदने और बेचने के लिए उपलब्ध हैं। इसे 'फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन' कहा जाता है। इसका अर्थ है उन शेयरों की कुल वैल्यू जो आम जनता और निवेशकों के लिए खुले बाजार में उपलब्ध हैं। इसमें उन शेयरों को शामिल नहीं किया जाता जो प्रमोटर्स, सरकार या बड़े निवेशकों के पास लॉक हैं।
फ्री फ्लोट मार्केट कैप की गणना
केवल वही शेयर जो प्रतिदिन ट्रेड होते हैं, इस गणना में शामिल होते हैं। इसे निकालने का तरीका यह है कि बाजार में चल रही शेयर की कीमत को उन शेयरों की संख्या से गुणा किया जाता है जो ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक कंपनी के पास कुल 100 शेयर हैं और उनमें से 60 प्रमोटर्स के पास हैं, तो केवल 40 शेयर ही आम जनता के लिए उपलब्ध हैं। इस स्थिति में, कंपनी का 'फ्री फ्लोट' 40 शेयर होगा।
टोटल मार्केट कैप बनाम फ्री फ्लोट मार्केट कैप
टोटल मार्केट कैप में सभी शेयरों को गिना जाता है, चाहे वे बिकने के लिए हों या नहीं। यह कंपनी का एक कागजी आकार दर्शाता है। दूसरी ओर, फ्री फ्लोट मार्केट कैप यह बताता है कि वास्तव में कितने शेयर बाजार में ट्रेड हो रहे हैं। निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख इंडेक्स इसी पद्धति का उपयोग करते हैं ताकि उन कंपनियों को अधिक महत्व दिया जा सके जिनमें आम निवेशकों का अधिक हिस्सा होता है।
उदाहरण: रिलायंस और कोल इंडिया
रिलायंस इंडस्ट्रीज: रिलायंस के पास बहुत सारे शेयर हैं, लेकिन प्रमोटर्स के पास एक बड़ा हिस्सा होने के कारण, इसका टोटल मार्केट कैप बड़ा दिखाई देता है। हालांकि, फ्री फ्लोट मार्केट कैप केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शेयरों के आधार पर कम होता है।
कोल इंडिया: कोल इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण, इसका फ्री फ्लोट मार्केट कैप टोटल मार्केट कैप की तुलना में काफी कम होता है।
फ्री फ्लोट फैक्टर
यह एक प्रतिशत है जो दर्शाता है कि कंपनी के कुल शेयरों में से कितने प्रतिशत शेयर बाजार में उपलब्ध हैं। इसका सूत्र है, बाजार में मौजूद शेयर ÷ कुल आउटस्टैंडिंग शेयर। यदि यह फैक्टर 50% है, तो इसका अर्थ है कि कंपनी का आधा हिस्सा ट्रेडिंग के लिए खुला है। यदि यह फैक्टर बढ़ता है, तो उस कंपनी का इंडेक्स में महत्व भी बढ़ जाता है, जिससे इंडेक्स फंड्स उसमें निवेश करने लगते हैं।
बाजार में उतार-चढ़ाव
यदि किसी शेयर का फ्री फ्लोट बहुत कम है, तो इसका मतलब है कि वह शेयर बाजार में सीमित मात्रा में उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में, थोड़े से लेन-देन से भी उसकी कीमत में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिसे 'वोलैटिलिटी' कहा जाता है। इसके विपरीत, यदि फ्री फ्लोट अधिक है, तो शेयर की कीमत में स्थिरता बनी रहती है। इसलिए बड़े निवेशक उन शेयरों को प्राथमिकता देते हैं जिनका फ्री फ्लोट अधिक होता है, ताकि वे बिना कीमत को प्रभावित किए अपने बड़े ऑर्डर को आसानी से पूरा कर सकें।
फ्री फ्लोट का महत्व
यह निवेशकों को सही जानकारी प्रदान करता है कि कितने शेयर वास्तव में खरीदे या बेचे जा सकते हैं। जिन कंपनियों का फ्री फ्लोट अधिक होता है, उनमें ट्रेडिंग करना आसान होता है। इसके अलावा, यह इंडेक्स को निष्पक्ष बनाए रखता है, ताकि किसी ऐसी कंपनी का दबदबा न हो जिसके अधिकांश शेयर प्रमोटर्स के पास लॉक हैं।
