सरकार ने हवाई किरायों में मनमाने बदलावों पर उच्चतम न्यायालय में दी जानकारी
हवाई किरायों में बदलावों पर सरकार की सक्रियता
केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में बताया कि हवाई किरायों और संबंधित शुल्कों में निजी एयरलाइनों द्वारा किए जाने वाले मनमाने बदलावों पर नागर विमानन मंत्रालय सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने गंभीर चिंता का विषय मानते हुए केंद्र को निर्णय प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है.
न्यायालय की गंभीर टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, "यह एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है। यदि ऐसा नहीं होता, तो हम अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाएं स्वीकार नहीं करते।" केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि मंत्रालय को जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम तीन सप्ताह की आवश्यकता है, क्योंकि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार-विमर्श चल रहा है.
अगली सुनवाई और पूर्व की टिप्पणियाँ
पीठ ने यह भी नोट किया कि मंत्रालय ने इस मामले को संज्ञान में लिया है और अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। इससे पहले, 19 जनवरी को, शीर्ष अदालत ने त्योहारों और आपात स्थितियों के दौरान हवाई किरायों में अत्यधिक वृद्धि को शोषण करार देते हुए केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा था.
याचिका में उठाए गए मुद्दे
उच्चतम न्यायालय ने 17 नवंबर को इस मामले में केंद्र, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए) को नोटिस जारी किए थे। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने याचिका में नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और सशक्त नियामकीय व्यवस्था बनाने की मांग की है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि निजी एयरलाइंस ने बिना किसी ठोस कारण के इकॉनमी श्रेणी में प्रति यात्री मुफ्त सामान ले जाने की चेक-इन सीमा को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है, जिससे अतिरिक्त कमाई की जा सके.
आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों पर प्रभाव
याचिका में त्योहारों, मौसम संबंधी व्यवधानों या आपात स्थितियों में अचानक किराया वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर और अंतिम समय में यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ने वाले बोझ का भी उल्लेख किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि वर्तमान में हवाई किरायों या संबंधित शुल्कों की सीमा तय करने या उनकी समीक्षा करने की शक्ति किसी प्राधिकरण के पास नहीं है, जिससे एयरलाइन कंपनियां 'डायनेमिक प्राइसिंग' के माध्यम से मनमाने ढंग से किराया बढ़ा देती हैं।
