सरकारी बैंकों ने 1.98 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक मुनाफा दर्ज किया
सरकारी बैंकों का अभूतपूर्व मुनाफा
नई दिल्ली: देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिसमें उन्होंने 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। यह आंकड़ा वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है, जो दर्शाता है कि पिछले वित्त वर्ष में इन बैंकों ने हर सेकंड 62 हजार रुपये से अधिक का लाभ कमाया। यह लगातार चौथा वर्ष है जब सरकारी बैंकों ने इस स्तर का मुनाफा कमाया है, जो देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
लोन और जमा राशि में वृद्धि
इस अभूतपूर्व लाभ के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार, ऋण का स्वस्थ विस्तार और आय में वृद्धि ने सरकारी बैंकों की लाभप्रदता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस दौरान, बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 31 मार्च, 2026 तक, सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, कुल जमा राशि में सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो दर्शाता है कि आम जनता और जमाकर्ताओं का इन बैंकों पर विश्वास बढ़ रहा है।
अर्थव्यवस्था की मजबूती से लोन की मांग में वृद्धि
देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने बैंकिंग क्षेत्र को भी लाभान्वित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऋण वितरण में सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 127 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मंत्रालय का कहना है कि यह विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऋण की निरंतर मांग का संकेत है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपनी व्यापार वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत पूंजी स्थिति के आधार पर यह रिकॉर्ड लाभप्रदता हासिल की है।
एनपीए में कमी और रिकवरी में तेजी
सरकारी बैंकों के लिए एक और राहत की खबर यह है कि उनके डूबते कर्ज यानी एनपीए में भारी कमी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में अप्रत्याशित सुधार हुआ। 31 मार्च, 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेश्यो घटकर 1.93 प्रतिशत और नेट एनपीए रेश्यो 0.39 प्रतिशत रह गया, जो कि स्ट्रेस्ड एसेट्स का ऐतिहासिक रूप से सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा, हर सरकारी बैंक ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज रेश्यो बनाए रखा है। नए स्लिपेज में भी कमी आई है, जो 0.7 प्रतिशत पर आ गया है। कुल रिकवरी, जिसमें राइट-ऑफ किए गए खातों से वसूली भी शामिल है, 86,971 करोड़ रुपये रही। यह दर्शाता है कि सरकारी बैंकों का रिकवरी तंत्र अब पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो चुका है।
