सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन पर लगे 202 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा लगाए गए 202 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया है। यह मामला 2019 में फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने से संबंधित है, जहां अमेजन पर आवश्यक जानकारी छिपाने का आरोप था। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
| May 27, 2026, 21:41 IST
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा लगाए गए 202 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया है। यह जुर्माना अमेजन पर फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने के दौरान आवश्यक जानकारी छिपाने के आरोप में लगाया गया था।
फैसले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि अमेजन से वसूली गई राशि को आठ सप्ताह के भीतर वापस किया जाए। अमेजन ने सीसीआई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी पर 2019 के सौदे के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया गया था।
मामले का विवरण
यह मामला 2019 में अमेजन द्वारा फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने से संबंधित है। उस समय अमेजन ने सीसीआई को बताया था कि उसका उद्देश्य गिफ्ट कार्ड, लॉयल्टी कार्ड और भुगतान सेवाओं के कारोबार को बढ़ावा देना है।
सीसीआई की जांच
हालांकि, जांच के दौरान सीसीआई को अमेजन के कुछ आंतरिक दस्तावेज मिले, जिनमें यह संकेत मिला कि कंपनी की असली रुचि फ्यूचर रिटेल के खुदरा कारोबार में रणनीतिक पकड़ बनाने की थी। इन दस्तावेजों में 'प्रोजेक्ट ताज' का उल्लेख था, जिसमें फ्यूचर रिटेल के स्टोर नेटवर्क और तेजी से सामान पहुंचाने की योजना शामिल थी।
सीसीआई का आरोप
सीसीआई ने कहा कि अमेजन ने सौदे की पूरी जानकारी सही तरीके से साझा नहीं की और फ्यूचर रिटेल से जुड़े समझौतों को छिपाया। आयोग ने यह भी माना कि अमेजन ने फ्यूचर कूपन्स को केवल एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया ताकि उसे फ्यूचर रिटेल में विशेष अधिकार मिल सकें।
अगले कदम
नवंबर 2019 में सीसीआई ने इस सौदे को मंजूरी दी थी, लेकिन यह भी कहा था कि यदि बाद में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है तो मंजूरी स्वतः रद्द मानी जाएगी। इसके बाद दिसंबर 2021 में सीसीआई ने अपनी मंजूरी को स्थगित करते हुए अमेजन को नया आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया था और 202 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अंतिम निर्णय
अमेजन ने इस निर्णय को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी, जिसने सीसीआई के अधिकांश निष्कर्षों को सही माना और जुर्माने को बरकरार रखा। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन को राहत देते हुए जुर्माना रद्द कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में बड़े कारोबारी अधिग्रहण और प्रतिस्पर्धा कानून से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। इसके साथ ही, इससे विदेशी निवेश और नियामक पारदर्शिता पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।
