सेबी ने भारतीय बाजारों में क्रांतिकारी बदलाव लाया: तुहिन कांत पांडे
सेबी के स्थापना दिवस पर महत्वपूर्ण बातें
सेबी के 38वें स्थापना दिवस पर चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा, सेबी की सबसे बड़ी ताकत इसकी विश्वसनीयता
बिजनेस डेस्क : सेबी के स्थापना दिवस पर तुहिन कांत पांडे ने बताया कि भारतीय बाजारों की मजबूती अचानक नहीं आई है। यह वर्षों के संस्थागत विकास, संतुलित नीतियों और मजबूत नियामकीय ढांचे का परिणाम है। इसी कारण वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पूंजी निर्माण और निवेश गतिविधियां जारी हैं।
पांडे ने कहा कि 12 अप्रैल 1988 को स्थापित होने के बाद से, सेबी ने भारतीय बाजारों में व्यापक बदलाव लाया है। पहले के खुले ट्रेडिंग सिस्टम और सीमित पारदर्शिता वाले बाजार अब रियल-टाइम, तकनीक आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन चुके हैं। स्क्रीन बेस्ड ट्रेडिंग, डीमैट व्यवस्था, रोलिंग सेटलमेंट, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस और मजबूत जोखिम प्रबंधन जैसे कदमों ने इस बदलाव को संभव बनाया।
सेबी की विश्वसनीयता
पांडे ने कहा कि संस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता है, जो वर्षों के सुधारों, मजबूत नियमन और निवेशकों के भरोसे से बनी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और तेजी से बदलती तकनीक के बावजूद भारतीय पूंजी बाजार मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी उपस्थित थीं।
भारत के बाजार का आकार और दायरा
पांडे ने बताया कि आज भारत के बाजार का आकार और दायरा तेजी से बढ़ा है। देश में 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां हैं, और 14 करोड़ से ज्यादा यूनिक निवेशक बाजार से जुड़े हैं। पिछले 10 वर्षों में बाजार पूंजीकरण लगभग 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है।
इसके अलावा, म्यूचुअल फंड उद्योग की परिसंपत्तियां 20 प्रतिशत सालाना दर से बढ़ी हैं। प्राथमिक बाजार हर साल लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भविष्य की प्राथमिकताओं पर बोलते हुए, पांडे ने कहा कि सेबी नियमों को सरल बनाने, कारोबार सुगमता बढ़ाने, तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने और गवर्नेंस सुधारों पर काम जारी रखेगा। संस्था ई-ऑफिस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फोरेंसिक और एआई आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रही है।
