सोने और चांदी की कीमतों में उछाल: क्या है इसके पीछे का कारण?
कीमती धातुओं में तेजी का नया दौर
पिछले साल 2025 के अंत में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई थी, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया था। लेकिन जैसे ही 2026 का नया साल शुरू हुआ, कीमती धातुओं ने फिर से तेजी पकड़ ली है। सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी दोनों ने शानदार शुरुआत की। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई के चलते वैश्विक तनाव में वृद्धि ने भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित किया है.
चांदी की कीमतों में अचानक उछाल
सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में अचानक तेजी देखी गई। मार्च एक्सपायरी वाली चांदी ने कारोबार की शुरुआत में ही जोरदार उछाल दिखाई। पिछले शुक्रवार को चांदी का भाव 2,36,316 रुपये प्रति किलो था, जबकि सोमवार को यह बढ़कर लगभग 2,49,900 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। इस प्रकार, एक ही दिन में चांदी की कीमत में लगभग 13,500 रुपये की वृद्धि हुई.
चांदी अभी भी रिकॉर्ड स्तर से नीचे
हालांकि, इस तेजी के बावजूद चांदी अभी भी अपने उच्चतम स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। इस साल की शुरुआत में चांदी ने 2,54,174 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, और वर्तमान में यह उस स्तर से लगभग 4,000 रुपये कम है, जिससे आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है.
सोने की कीमतों में भी वृद्धि
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने के दाम सोमवार को लगभग 2,400 रुपये बढ़ गए। शुक्रवार को 10 ग्राम सोना 1,35,761 रुपये पर बंद हुआ था, जो सोमवार को शुरुआती कारोबार में बढ़कर लगभग 1,38,200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान फिर से सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहा है.
कीमतों में वृद्धि का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है। जब भी राजनीतिक या सैन्य तनाव बढ़ता है, निवेशक जोखिम भरे विकल्पों से दूर होकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी हमेशा से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग तेजी से बढ़ जाती है.
इस बार कीमतों में उछाल का मुख्य कारण अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा और सोना-चांदी महंगे हो गए.
