सोने और चांदी पर आयात शुल्क वृद्धि से रत्न उद्योग में चिंता
आयात शुल्क में वृद्धि का प्रभाव
केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% करने का निर्णय लिया है, जिससे रत्न और आभूषण उद्योग में गहरी चिंता उत्पन्न हुई है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने बुधवार को इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस भारी वृद्धि से आयात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
जीजेईपीसी की चिंताएँ
जीजेईपीसी ने एक बयान में कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने से सोने का आयात कम होने की संभावना नहीं है। इसके बजाय, यह केवल कीमतों में वृद्धि करेगा। हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में दोगुनी वृद्धि के बावजूद, आयात में कमी नहीं आई है। परिषद ने यह भी बताया कि उच्च शुल्क तस्करी को बढ़ावा देते हैं और निर्यात की लागत को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, निर्यातकों को अब नामित एजेंसियों से शुल्क-मुक्त सोना प्राप्त करने के लिए प्रति किलोग्राम 28-30 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी पड़ रही है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों पर प्रभाव
बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस निर्णय का सबसे गंभीर प्रभाव सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (MSME) निर्माताओं पर पड़ेगा। परिषद के 80 प्रतिशत सदस्य इस समय गंभीर नकदी संकट का सामना कर रहे हैं।
सरकार के साथ संवाद
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसमें प्लैटिनम पर भी कर बढ़ाया गया है। परिषद ने प्रमुख खुदरा विक्रेताओं और निर्माताओं के साथ बैठकें की हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सोने के आयात को नियंत्रित करने के उपाय सुझाए हैं। इन उपायों में कम शुद्धता वाले आभूषणों को बढ़ावा देना, पुराने सोने के विनिमय कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना, और स्वर्ण मौद्रीकरण योजना को पुनर्जीवित करना शामिल हैं।
भविष्य की दिशा
जीजेईपीसी ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह उद्योग के हितधारकों के साथ संवाद करे ताकि राजकोषीय लक्ष्यों और निर्यात वृद्धि के बीच संतुलन बनाया जा सके। परिषद जल्द ही स्वर्ण मौद्रीकरण योजना पर एक विस्तृत दस्तावेज सरकार को सौंपेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन सुझावों पर ध्यान देती है, तो बिना शुल्क बढ़ाए भी विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सकता है और उद्योग के हितों की रक्षा की जा सकती है।
