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BHU और BFSU के बीच पाली अध्ययन में सहयोग का नया अध्याय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी (BFSU) ने पाली भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग न केवल दोनों विश्वविद्यालयों को जोड़ता है, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को भी मजबूत करेगा। इस समझौते के तहत छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाएँ और शैक्षणिक कार्यक्रमों की स्थापना की जाएगी।
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BHU और BFSU के बीच पाली अध्ययन में सहयोग का नया अध्याय

BHU और BFSU के बीच समझौता

BHU और BFSU पाली अध्ययन : वाराणसी से एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक समाचार आया है, जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी (BFSU) ने पाली भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग न केवल दोनों विश्वविद्यालयों को जोड़ता है, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।


यह समझौता बुधवार को एक ऑनलाइन समारोह के माध्यम से संपन्न हुआ, जिसमें दोनों संस्थानों के प्रमुख अधिकारी अपने-अपने परिसर से जुड़े। बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय और BFSU के पूर्व परिसर के प्रशासनिक भवन से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।


समझौते की विशेषताएँ
इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अंतर्गत पाली और उससे संबंधित विषयों पर कई महत्वपूर्ण पहल की जाएंगी, जैसे:
- छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के बीच आदान-प्रदान
- संयुक्त शोध परियोजनाएँ
- शैक्षणिक कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों की स्थापना
- अध्ययन सामग्री और संसाधनों का साझा उपयोग
- संयुक्त डिप्लोमा कार्यक्रमों की संभावनाएँ


हस्ताक्षर करने वाले
इस समझौते पर BFSU की ओर से उपाध्यक्ष प्रो. चाऊ कांग और बीएचयू की ओर से कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए।


बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत को पाली और संस्कृत जैसी प्राचीन भाषाओं की जन्मभूमि होने का गर्व है। उन्होंने इसे वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इसकी सफलता सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।


महत्व का कारण
प्रो. चाऊ कांग ने इस पहल को भारत-चीन शैक्षणिक सहयोग के बढ़ते रिश्तों का सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने वाराणसी को एक पवित्र और ऐतिहासिक नगरी बताते हुए भविष्य में बीएचयू आने की इच्छा भी व्यक्त की। उनके अनुसार, बीएचयू पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का अनूठा संगम है, जो इसे वैश्विक स्तर पर विशेष बनाता है।


कार्यक्रम में शामिल लोग
इस अवसर पर बीएचयू से कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल, अंतरराष्ट्रीय केंद्र के समन्वयक प्रो. राजेश कुमार सिंह और पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार उपस्थित रहे। वहीं, BFSU की ओर से अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यालय के उपनिदेशक कोंग चींग सहित कई शिक्षाविद इस कार्यक्रम का हिस्सा बने।