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CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज, ठेका प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राहुल गांधी द्वारा COEMPT Edutech को ठेका देने के आरोपों को खारिज कर दिया है। CBSE ने कहा कि आरोप निराधार हैं और ठेका देने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी थी। राहुल गांधी ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जबकि उन्होंने कंपनी के विवादित इतिहास का भी उल्लेख किया। जानें पूरी कहानी में क्या है।
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CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज, ठेका प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

CBSE ने आरोपों का किया खंडन


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा COEMPT Edutech को ठेका देने के संबंध में उठाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि ये आरोप निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक हैं। CBSE ने बताया कि ठेका देने की प्रक्रिया पूरी तरह से निर्धारित नियमों के अनुसार की गई थी, जिसमें कंपनी को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के लिए डिजिटलाइजेशन का कार्य सौंपा गया।


निविदा प्रक्रिया की जानकारी

CBSE ने यह भी बताया कि 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन हेतु 28 अगस्त, 2025 को निविदाएं जारी की गई थीं। इस कार्य के लिए केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा प्रकाशित की गई थी, और केवल योग्य बोलीदाता को ही ठेका दिया गया।


राहुल गांधी के आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ओएसएम प्रणाली और COEMPT Edutech को ठेका देने पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। राहुल का कहना है कि कंपनी का पुराना रिकॉर्ड खराब होने के बावजूद CBSE ने उसे ठेका दिया। उन्होंने ठेका देने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए और कंपनी तथा केंद्र सरकार के बीच संबंधों को सार्वजनिक करने की मांग की।


कंपनी का विवादित इतिहास

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि COEMPT Edutech पहले Globarena के नाम से जानी जाती थी। 2019 और 2023 में तेलांगना की बोर्ड परीक्षाओं में इस कंपनी का नाम विवादों में आया था, जो ऑन-स्क्रीन मार्किंग से संबंधित था। उस समय कंपनी के कारण तेलांगना में 23 छात्रों ने आत्महत्या की थी।