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CBSE में बड़े बदलाव: शीर्ष अधिकारियों का तबादला और जांच समिति का गठन

केंद्रीय सरकार ने सीबीएसई में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव का तबादला किया है। इसके साथ ही, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति टेंडर प्रक्रिया और नियमों में किए गए परिवर्तनों की समीक्षा करेगी। विवाद की शुरुआत टेंडर में संशोधनों से हुई है, जिसके चलते कुछ कंपनियों को लाभ मिलने की आशंका जताई जा रही है। जानें इस मामले में और क्या हो रहा है।
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CBSE में बड़े बदलाव: शीर्ष अधिकारियों का तबादला और जांच समिति का गठन

सीबीएसई में महत्वपूर्ण निर्णय


केंद्रीय सरकार ने मंगलवार को सीबीएसई से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय लिया है। बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला किया गया है। इसके साथ ही, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है।


सरकार का निर्णय

ओएसएम विवाद के चलते, केंद्र सरकार ने तुरंत प्रभाव से सीबीएसई के दोनों प्रमुख अधिकारियों का तबादला किया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को टेंडर प्रक्रिया, खरीद व्यवस्था और नियमों में किए गए परिवर्तनों की गहन समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया है। यदि आवश्यक हो, तो समिति अन्य सरकारी विभागों और विशेषज्ञों की सहायता भी ले सकती है।


टेंडर प्रक्रिया पर उठते सवाल

यह विवाद ओएसएम सेवा के लिए जारी किए गए टेंडर से शुरू हुआ। आरोप है कि टेंडर दो बार रद्द होने के बाद तीसरी बार नियमों में बदलाव किए गए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पात्रता शर्तों में संशोधन से कुछ कंपनियों को लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से औसत वार्षिक टर्नओवर, तकनीकी योग्यता और अन्य पात्रता मानकों में बदलाव पर सवाल उठाए गए हैं।


नियमों में बदलाव पर चर्चा

आरोपों के अनुसार, टेंडर की शर्तों में ऐसे संशोधन किए गए हैं जो प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ तकनीकी मानकों को पहले की तुलना में अधिक लचीला बनाया गया है, जिसमें डेटा सेंटर की व्यवस्था, तकनीकी प्रमाणन और ब्लैकलिस्टिंग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, जिसके कारण सरकार ने स्वतंत्र जांच का निर्णय लिया है।