नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक: एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल
नीट यूजी परीक्षा का पेपर लीक
तीन साल में दूसरी बार मेडिकल में दाखिले के लिए आयोजित नीट यूजी परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक हो गया, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इससे लगभग 23 लाख छात्रों को गहरा सदमा लगा है। इस घटना के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर सवाल उठने लगे हैं, जो परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी संभालती है। यह स्पष्ट है कि एनटीए की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं रही है।
2024 में भी नीट यूजी के पेपर लीक हुए थे, जिसमें अन्य गड़बड़ियों की भी खबरें आई थीं। उस समय कुछ परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को असामान्य अंक मिले थे, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई थी। इस बार, पेपर लीक का मामला बड़ा था, जिससे परीक्षा को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। व्हाट्सऐप के माध्यम से एक प्रश्न बैंक हजारों लोगों तक पहुंच गया, जिसमें से आधे से अधिक प्रश्न परीक्षा में शामिल हुए।
इससे पहले 2024 और 2026 की परीक्षाओं में गड़बड़ियों का पता चला था, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या 2025 की परीक्षा में भी ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं थी। एनटीए द्वारा आयोजित अधिकांश परीक्षाओं में गड़बड़ियों की खबरें आती रही हैं। पिछले साल नीट पीजी और नेट पीजी की परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों की सूचना मिली थी।
सरकार ने 2024 की गड़बड़ी के बाद सख्त कदम उठाए थे और इसरो के पूर्व चेयरमैन राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने कई सुझाव दिए थे, जिन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एक सुझाव यह था कि नीट की परीक्षा को कंप्यूटर आधारित किया जाए, जैसा कि जेईई की परीक्षा में होता है।
हालांकि, यह समस्या का समाधान नहीं है। नीट यूजी परीक्षा को 'हाई स्टेक एक्जाम' माना जाता है, क्योंकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या सीमित है और निजी कॉलेजों की फीस बहुत अधिक है। इस कारण छात्र प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए प्रयास करते हैं।
पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों की गड़बड़ियों को रोकने के लिए केवल कंप्यूटर आधारित परीक्षा का आयोजन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अन्य उपायों पर भी विचार करने की आवश्यकता है। सबसे पहले, सरकार को 'एक देश, एक परीक्षा' की अवधारणा पर पुनर्विचार करना चाहिए। यदि राज्यों में अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जाएं, तो पूरे देश की परीक्षा रद्द करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
दूसरा उपाय यह हो सकता है कि मेडिकल शिक्षा को सस्ता बनाया जाए। सरकार को फीस को विनियमित करना चाहिए और अधिक गुणवत्तापूर्ण मेडिकल कॉलेज खोलने चाहिए। तीसरा उपाय यह है कि मेडिकल में दाखिले के लिए दो परीक्षाएं आयोजित की जाएं, जैसे जेईई में होती हैं।
अंत में, परीक्षा कराने वाली संस्थाओं को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता है। एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए शीर्ष अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।
