मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: शराब के नशे में शिक्षक की शर्मनाक हरकत

मध्य प्रदेश में शिक्षा का संकट
MP News: मध्य प्रदेश के मऊगंज क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका, अंजनी साकेत, शराब के नशे में अधनंगी अवस्था में स्कूल के बाहर सड़क पर पाई गईं। इस दृश्य को वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, और यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया, जिसके चलते उन्होंने शिक्षिका के निलंबन की मांग की।
स्थानीय लोगों का गुस्सा
गवाहों के अनुसार, शिक्षिका ने स्कूल परिसर में हंगामा किया और फिर जमीन पर गिर गईं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वह अक्सर स्कूल में शराब पीती थीं। एक गुस्साए व्यक्ति ने कहा कि जिस व्यक्ति को बच्चों की शिक्षा का जिम्मा सौंपा गया है, वह खुद इस तरह की हरकतें कर रही है। ऐसे में उसे बच्चों के बीच पढ़ाने का कोई हक नहीं है।
निलंबन की मांग
वीडियो बनाने वाले लोगों ने यह सवाल उठाया कि जब शिक्षक खुद नशे में धुत होकर सड़क पर पड़े हों, तो वे विद्यार्थियों को क्या शिक्षा देंगे। लोगों ने जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और शिक्षिका के निलंबन की मांग की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मऊगंज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, शत्रुघ्न प्रसाद मिश्रा ने घटना की पुष्टि की और कहा कि मामले की जांच चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि शिक्षिका दोषी पाई गईं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सिवनी में एक और घटना
इसी सप्ताह मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक, महेश चौधरी का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे बच्चों के साथ क्रूरता करते नजर आए। वीडियो में उन्हें एक छह साल के बच्चे का मुंह दबाते और उसे जमीन पर लिटाकर उसकी रीढ़ पर छड़ी रखकर दबाव डालते देखा गया। इस दौरान बच्चे की पीठ पर गहरा घाव हो गया।
बच्चियों पर भी हिंसा
वायरल वीडियो के एक अन्य हिस्से में महेश चौधरी को एक छोटी बच्ची को बेरहमी से पीटते हुए भी देखा जा सकता है। यह दृश्य न केवल स्थानीय समुदाय बल्कि पूरे प्रदेश में लोगों को झकझोर देने वाला था। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद आमजन ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इन दोनों घटनाओं ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर शिक्षक नशे में धुत होकर अपनी जिम्मेदारियों को भूल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों पर अमानवीय अत्याचार हो रहा है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें।