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समय मापने के उपकरणों का विकास: एक ऐतिहासिक यात्रा

समय मापने के उपकरणों का विकास एक दिलचस्प यात्रा है, जो प्राचीन धूप घड़ी से शुरू होकर आधुनिक पेंडुलम घड़ी तक फैली हुई है। इस लेख में, हम समय के मापन के विभिन्न तरीकों और उपकरणों के इतिहास पर चर्चा करेंगे, जिसमें प्राचीन मिस्र की तकनीक से लेकर 14वीं सदी में मैकेनिकल घड़ियों के आविष्कार तक शामिल हैं। जानें कि कैसे समय मापने की तकनीक ने मानव जीवन को प्रभावित किया है और इसके विकास में क्या महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।
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समय मापने के उपकरणों का विकास: एक ऐतिहासिक यात्रा

समय की समझ और मापन की शुरुआत


नई दिल्ली: आज के युग में समय मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है, लेकिन यह व्यवस्था अचानक नहीं बनी। घड़ी के अविष्कार से पहले भी, मानव समय को समझता और मापता था। प्राचीन सभ्यताओं में समय का ज्ञान पूरी तरह से प्राकृतिक घटनाओं पर निर्भर था। सूरज का उगना दिन की शुरुआत और डूबना दिन के अंत का संकेत माना जाता था। चांद के चरणों से महीनों की गणना होती थी और तारे मौसम के बदलाव का संकेत देते थे।


प्राचीन मिस्र में समय का विभाजन

समय को व्यवस्थित रूप से बांटने की पहली महत्वपूर्ण कोशिश प्राचीन मिस्र में हुई। लगभग 1550 से 1069 ईसा पूर्व के बीच, मिस्रवासियों ने दिन को 24 भागों में बांटा, जिसमें 12 घंटे दिन के और 12 घंटे रात के लिए निर्धारित किए गए। हालांकि, उस समय घंटे की लंबाई स्थिर नहीं थी; गर्मियों में दिन लंबे होने के कारण घंटे बड़े और सर्दियों में छोटे होते थे।


पहला ज्ञात समय मापने का उपकरण

कैसा था पहला ज्ञात उपकरण?


समय मापने का पहला ज्ञात उपकरण धूप घड़ी थी। इसमें एक सीधी छड़ी, जिसे नोमोन कहा जाता था, जमीन में लगाई जाती थी। सूरज की स्थिति के अनुसार छड़ी की छाया बदलती थी, जिससे समय का अनुमान लगाया जाता था। प्राचीन मिस्र में लगभग 1500 ईसा पूर्व की धूप घड़ी के प्रमाण मिले हैं।


धूप घड़ी की सीमाएं

धूप घड़ी की क्या थी कमी?


धूप घड़ी की सबसे बड़ी कमी यह थी कि यह रात या बादलों के समय काम नहीं करती थी। इस समस्या के समाधान के लिए पानी की घड़ी का आविष्कार किया गया। भारत में इसे घटी यंत्र कहा जाता था, जिसमें एक बर्तन से दूसरे बर्तन में पानी के बहाव के जरिए समय मापा जाता था।


14वीं सदी में बदलाव

कब आया बड़ा बदलाव?


समय मापने में असली बदलाव 14वीं सदी में आया, जब यूरोप में मैकेनिकल घड़ियों का आविष्कार हुआ। इन घड़ियों में वजन, गियर और एस्केपमेंट मैकेनिज्म का उपयोग होता था। ये घड़ियां प्राकृतिक रोशनी पर निर्भर नहीं थीं, हालांकि प्रारंभिक दौर में ये अधिक सटीक नहीं थीं।


पेंडुलम घड़ी का आविष्कार

कब आई पेंडुलम घड़ी?


1656 में डच वैज्ञानिक क्रिश्चियन ह्यूजेंस ने पेंडुलम घड़ी का आविष्कार किया, जिससे समय मापने की सटीकता में बड़ा सुधार हुआ। इसके बाद, 1505 में जर्मनी के पीटर हेनलेन ने पहली पोर्टेबल घड़ी बनाई, जिससे लोग समय को अपने साथ ले जाने लगे।