सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा अनिवार्य करने के मामले में केंद्र और CBSE को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में तीसरी भाषा का विवाद
नई दिल्ली - कक्षा 9वीं और 10वीं में तीसरी भाषा को अनिवार्य करने के CBSE के निर्णय को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती दी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में यह कहा गया है कि नई भाषा नीति छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव डाल सकती है, जिससे पढ़ाई का बोझ बढ़ने की संभावना है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और CBSE से जवाब मांगा है। अदालत ने अगली सुनवाई जुलाई के मध्य में निर्धारित की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि छात्रों पर पहले से ही पढ़ाई का दबाव है, ऐसे में तीसरी भाषा को अनिवार्य करना कई विद्यार्थियों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है।
वास्तव में, CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 के तहत 2026-27 सत्र से नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा।
नए नियम के अनुसार, छात्रों को R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाओं का चयन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या किसी अन्य विदेशी भाषा को चुनना चाहता है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी लिया जा सकेगा जब पहली दो भाषाएं भारतीय हों। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेशी भाषाओं को चौथी भाषा के विकल्प के रूप में भी चुना जा सकता है।
CBSE के इस निर्णय को लेकर शिक्षा क्षेत्र में बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाला कदम मानते हैं, जबकि कई अभिभावक और छात्र इसे अतिरिक्त बोझ समझते हैं। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।
