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केरल विधानसभा चुनाव 2026: सीपीआईएम में बगावत से बढ़ी मुख्यमंत्री विजयन की चिंता

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उनकी पार्टी के बागी नेता जी सुधाकरण ने खुलकर बगावत कर दी है। यह पहली बार है जब लेफ्ट के गढ़ में इस तरह की टूट हो रही है। सुधाकरण और अन्य नेताओं ने कांग्रेस का समर्थन प्राप्त किया है, जिससे चुनावी स्थिति और भी जटिल हो गई है। जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे की पूरी कहानी और आगामी चुनावों में क्या संभावनाएँ हैं।
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केरल विधानसभा चुनाव 2026: सीपीआईएम में बगावत से बढ़ी मुख्यमंत्री विजयन की चिंता

मुख्यमंत्री की बढ़ती चिंता

केरल में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चिंता बढ़ती जा रही है। उनकी चिंता का मुख्य कारण उनकी पार्टी के बागी नेता हैं, जो विपक्ष से ज्यादा परेशान कर रहे हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के वरिष्ठ नेता जी सुधाकरण ने अब खुलकर बगावत कर दी है। यह पहली बार है जब लेफ्ट के गढ़ में इस तरह की टूट हो रही है। इसके अलावा, कई नेता कांग्रेस और अन्य पार्टियों की ओर रुख कर रहे हैं। जी सुधाकरण ने अपने जीवन का अधिकांश समय लेफ्ट की विचारधारा के लिए समर्पित किया, लेकिन अब वे कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के साथ मंच साझा कर रहे हैं। अकेले सुधाकरण ही नहीं, बल्कि लगभग एक दर्जन नेता सीएम विजयन के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहे हैं।


पार्टी में बढ़ती असंतोष की लहर

सी सुधाकरण को 2021 के चुनाव में पार्टी द्वारा साइडलाइन किया गया था, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीति के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। हालाँकि, पिछले पांच वर्षों में राज्य में कई बदलाव हुए हैं। सीएम विजयन के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ गया है। जी सुधाकरण ने निर्दलीय चुनाव में उतरने का निर्णय लिया है, और कांग्रेस ने इस मौके का लाभ उठाते हुए उन्हें समर्थन दिया है। अब वे राहुल गांधी के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिससे लेफ्ट के लिए अलप्पुझा सीट पर चुनाव लड़ना कठिन हो गया है।


बागियों की बढ़ती संख्या

जी सुधाकरण ने 63 वर्षों तक कम्युनिस्ट पार्टी को समर्पित किया है। उनका राजनीतिक इतिहास लंबा है। आमतौर पर केरल में लेफ्ट के नेता अपनी पार्टी के खिलाफ मुखर नहीं होते, लेकिन इस बार कई अन्य नेता भी बगावत कर रहे हैं। सीएम विजयन ने कहा है कि कुछ नेताओं में संसदीय महत्वाकांक्षा बढ़ गई है, जिससे चुनाव जीतने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले इस तरह की बगावतें नहीं होती थीं।


अन्य बागी नेता

सुधाकरण के अलावा, वी कुन्हीकृष्णन और टी के गोविंदन जैसे प्रमुख नेता भी बगावत कर चुके हैं। वी कुन्हीकृष्ण पय्यानूर से और गोविंदन तालिपारम्बा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। गोविंदन ने पार्टी पर टिकट न देने का आरोप लगाया है। हालांकि, सीएम विजयन का कहना है कि टिकट वितरण में एक सुनियोजित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। गोविंदन और कुन्हीकृष्ण को भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन प्राप्त है।


9 अप्रैल को मतदान

केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहे लेफ्ट गठबंधन के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस कोई बड़ी गलती नहीं करती है, तो यूडीएफ की जीत निश्चित है। हालांकि, बागियों ने कांग्रेस गठबंधन की स्थिति को भी चुनौती दी है। एलडीएफ ने कांग्रेस और यूडीएफ के करीब 10 नेताओं का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समर्थन किया है। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे।