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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के कारण

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को हाल के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के पीछे कई कारण हैं, जैसे आरजी कर अस्पताल बलात्कार कांड, शिक्षक भर्ती घोटाला, और भाजपा द्वारा स्थापित कट मनी नैरेटिव। इसके अलावा, अल्पसंख्यक वोटों में सेंध और विकास की कमी ने भी उनकी स्थिति को कमजोर किया। जानें इस हार के पीछे की पूरी कहानी और ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।
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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के कारण

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर

पश्चिम बंगाल में 2011 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कोई मुकाबला नहीं था। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भी सफलता नहीं पाई। तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव इतना मजबूत था कि भाजपा को दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।


अब ममता बनर्जी का राजनीतिक भविष्य संदेह में है, क्योंकि हाल के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा है। 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद, जनता ने तृणमूल कांग्रेस को बड़े पैमाने पर नकार दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC ने 42 में से 29 सीटें जीती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।


ममता बनर्जी की हार के कारण

कैसे दरकती गई ममता बनर्जी की जमीन? वजहें समझिए



  • आरजी कर रेप कांड: आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की घटना ने ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया। अगस्त 2024 में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या कर दी गई, जिससे पूरे बंगाल में आक्रोश फैल गया। सरकार ने इसे सामान्य मामला बताया, लेकिन ममता बनर्जी ने न्याय की मांग की। जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ और आरोप लगे कि अस्पताल प्रशासन और TMC नेताओं के बीच गठजोड़ था।

  • शिक्षक भर्ती घोटाला: भ्रष्टाचार ने ममता बनर्जी की विदाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 25,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी, यह कहते हुए कि चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार था। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी से जुड़े ठिकानों पर बरामद नोटों की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।

  • सिंडिकेट वाला नैरेटिव: भाजपा ने यह स्थापित किया कि ममता बनर्जी की सरकार में कट मनी और गुंडागर्दी का बोलबाला है। TMC पर आरोप लगा कि पार्टी के नेता हर काम में कमीशन लेते हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी।

  • अल्पसंख्यक वोटों में सेंध: ममता बनर्जी ने खुद को अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा हितैषी बताया, लेकिन इस बार उनके वोट बैंक में सेंध लगी। पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर की पार्टी और इंडियन सेकुलर फ्रंट ने कुछ सीटों पर वोट काटे।

  • विकास और शासन से भटकी TMC: ममता बनर्जी की हार का एक कारण उनकी आक्रामक राजनीति भी है। उन्होंने केंद्र की सरकार से सीधे टकराव किया, जिससे लोग असहज हो गए। विकास और शासन की बजाय उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उनकी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई।