Raakaasa: एक पुरानी हॉरर-कॉमेडी का नया प्रयास
The film 'Raakaasa' attempts to blend horror and comedy but ultimately falls short of delivering a fresh narrative. Centered around the character Veerababu, the story involves ancient rituals and a curse, yet it often strays into unnecessary subplots. While the performances, especially by the lead actor, are commendable, the weak writing and forced humor detract from the overall experience. With a slow start and a reliance on clichés, 'Raakaasa' may disappoint those seeking a thrilling or innovative storyline. Read on to explore the film's strengths and weaknesses in detail.
| Apr 8, 2026, 16:35 IST
हॉरर-कॉमेडी का जटिल संतुलन
हॉरर-कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जो डर और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश करता है। हाल के वर्षों में तेलुगू सिनेमा में इस शैली का काफी इस्तेमाल हुआ है। निर्देशक मानसा शर्मा की फिल्म 'Raakaasa' भी इसी दिशा में कदम बढ़ाती है, लेकिन यह नई सोच लाने में असफल रहती है और पुराने रास्तों पर ही चलती रहती है।
कहानी: सस्पेंस और श्राप का जाल
कहानी वीरबाबू (संगीत शोभन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक NRI है और अपने गांव लौटता है। वहां वह एक राक्षस से जुड़ी पुरानी रस्म में फंस जाता है। एक श्राप, चेतावनी के संकेत, और नरबलि का विचार कहानी का मुख्य टकराव बनाते हैं। इस सेटअप में सस्पेंस और भावनात्मक गहराई की संभावनाएं हैं, लेकिन फिल्म इनका पूरा उपयोग नहीं कर पाती। निर्देशक मानसा शर्मा और उनकी टीम कुछ दिलचस्प विचार पेश करती हैं, लेकिन कहानी बार-बार गैर-ज़रूरी मोड़ों पर भटक जाती है। प्रेम कहानियां और अनावश्यक कॉमेडी सीन फिल्म के मुख्य विषय को कमजोर कर देते हैं।
अभिनय: कलाकारों की मेहनत पर भारी लेखन की कमी
फिल्म की जान इसके कलाकारों के प्रदर्शन में है:
संगीत शोभन: वीरबाबू के रूप में उनकी सहजता और कॉमिक टाइमिंग प्रशंसनीय है।
नयन सारिका: उन्होंने अपनी भूमिका ठीक से निभाई, लेकिन उनके किरदार में गहराई की कमी थी।
कॉमेडी ब्रिगेड: वेनेला किशोर की एंट्री फिल्म में थोड़ी राहत लाती है। गेटअप श्रीनु और ब्रह्माजी जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी प्रयास किए, लेकिन खराब जोक्स ने उनकी मेहनत को फीका कर दिया।
दिग्गज कलाकार: तनिकेला भरानी और आशीष विद्यार्थी जैसे बड़े नाम छोटे किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ते हैं।
कमजोर कड़ियाँ: फिल्म की असफलताएँ
धीमी शुरुआत और ज़बरदस्ती की कॉमेडी: फिल्म का पहला भाग उबाऊ है। कॉमेडी सीन दर्शकों को हंसाने के बजाय उनके सब्र की परीक्षा लेते हैं। कहानी अक्सर मुख्य मुद्दे से भटक जाती है। खलनायक को एक बड़ी ताकत के रूप में दिखाने के बाद, फिल्म अंत में एक घिसे-पिटे इमोशनल ड्रामा का सहारा लेती है। अनुदीप देव का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर निराश करता है।
तकनीकी पक्ष: कुछ अच्छा, कुछ औसत
फिल्म का प्रोडक्शन डिज़ाइन प्रशंसा के योग्य है, खासकर दूसरे हाफ में किले के दृश्य। सिनेमैटोग्राफी भी अच्छी है, लेकिन VFX में सुधार की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: क्या देखनी चाहिए?
'Raakaasa' एक ऐसी फिल्म है जो कुछ नया होने का वादा करती है, लेकिन अंततः पुरानी हॉरर-कॉमेडी के जाल में फंस जाती है। यदि आप संगीत शोभन के प्रशंसक हैं या टाइम-पास के लिए कोई फिल्म देखना चाहते हैं, तो इसे देख सकते हैं। लेकिन यदि आप नई और रोमांचक कहानी की तलाश में हैं, तो यह फिल्म निराश कर सकती है।
रेटिंग: 2/5
