असरानी: कॉमेडी के बादशाह बनने की कहानी
असरानी की कॉमेडी यात्रा
मुंबई: 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं' जैसे संवाद सुनते ही असरानी की याद आ जाती है, जो कॉमेडी के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं।
हालांकि अभिनेता अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी नई फिल्म 'भूत बंगला' आज सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो गई है। असरानी ने अक्षय कुमार के साथ 'हैवान' में भी काम किया है, जो एक आगामी फिल्म है। 'भूत बंगला' के रिलीज होते ही उनके प्रशंसक उनकी कॉमेडी की सराहना कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असरानी ने कॉमेडी के कौशल को कहां से सीखा?
फिल्मों जैसे 'शोले', 'चुपके चुपके', 'बावर्ची', 'अभिमान', 'नमक हराम', और 'परिचय' में दर्शकों को हंसाने वाले असरानी के लिए कॉमेडी केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक भावना थी। उन्होंने अपने करियर के प्रारंभिक दिनों में किशोर कुमार, महमूद, और जॉनी वॉकर से प्रेरणा ली। असरानी किशोर कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी फिल्मों की शूटिंग देखकर कॉमिक टाइमिंग का महत्व समझा।
एक इंटरव्यू में असरानी ने बताया कि दर्शकों को हंसाने के लिए कॉमिक टाइमिंग का ज्ञान होना आवश्यक है। यदि सही समय पर संवाद नहीं बोला गया, तो चुटकुला बेकार हो जाता है। यह बात किशोर कुमार और महमूद से बेहतर कोई नहीं जानता। पहले कॉमेडी चेहरे के हाव-भाव पर निर्भर करती थी, लेकिन आज की कॉमेडी में कॉमिक टाइमिंग की अहमियत है।
असरानी ने जॉनी वॉकर के साथ एक फिल्म में काम किया, जहां उन्होंने सेट पर बहुत कुछ सीखा। उन्होंने बताया कि जॉनी वॉकर सुबह 4 बजे उठकर व्यायाम करते थे और कभी भी शूटिंग पर लेट नहीं होते थे। उन्होंने मुझे भी समझाया कि कभी भी प्रोड्यूसर का पैसा दांव पर मत लगाओ। उस दिन के बाद से, मैं किसी भी सेट पर लेट नहीं पहुंचा। जॉनी वॉकर उनके लिए एक शिक्षक की तरह थे, जो पर्दे पर कॉमेडी को सहजता से करते थे, और उनकी कॉमिक टाइमिंग अद्भुत थी।
