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इरफान खान: एक अद्वितीय अभिनेता की कहानी

इरफान खान, जो 7 जनवरी 1967 को राजस्थान में जन्मे, ने हिंदी सिनेमा में अपनी मेहनत और प्रतिभा से एक विशेष स्थान बनाया। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने उन्हें जल्दी ही हमसे छीन लिया, लेकिन उनके विचार और अभिनय आज भी जीवित हैं। इरफान ने शाकाहारी जीवन जीया और इंसानियत को धर्म से ऊपर रखा। उनके जीवन की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी उजागर करती है।
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इरफान खान: एक अद्वितीय अभिनेता की कहानी

इरफान खान का जीवन और करियर


मुंबई: इरफान खान का जन्म 7 जनवरी 1967 को राजस्थान के टोंक जिले में हुआ। एक साधारण मुस्लिम पठान परिवार में जन्मे इरफान ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर हिंदी सिनेमा में एक विशेष स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कभी खुद को किसी एक श्रेणी में सीमित नहीं किया। उनका जीवन और दृष्टिकोण हमेशा मानवता के चारों ओर घूमता रहा।


इरफान ने अपने जीवन में बहुत ऊँचाइयाँ हासिल कीं, लेकिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने उन्हें जल्दी ही हमसे छीन लिया। उनकी मृत्यु के बाद भी, उनके अभिनय और विचार आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। इरफान केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक विचारधारा थे जो समाज को आईना दिखाते थे।


मुस्लिम परिवार में जन्मे इरफान का शाकाहारी जीवन

इरफान का जन्म एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था। आमतौर पर, मुस्लिम परिवारों में मांसाहार खाना सामान्य माना जाता है, लेकिन इरफान इस धारणा से भिन्न थे। उन्होंने कई बार कहा कि वह बचपन से ही शाकाहारी रहे हैं और मांसाहार से दूर रहते थे।


वे न केवल मांसाहार से दूर रहते थे, बल्कि जीव हिंसा के खिलाफ भी थे। जानवरों को नुकसान पहुँचाने का विचार उन्हें बहुत परेशान करता था। उनका मानना था कि किसी भी जीव को मारकर खाना सही नहीं है, और यही सोच उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।


पिता का मजाक और इरफान की पहचान

एक इंटरव्यू में इरफान ने हंसते हुए बताया कि उनके पिता उनकी इस आदत से चकित रहते थे। पिता मजाक में कहते थे कि पठान के घर में एक ब्राह्मण पैदा हो गया है। यह बात परिवार में हंसी-मजाक का विषय बन गई थी।


इरफान की शाकाहारी आदत केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे आस-पास के लोग भी उनकी इस सोच को जानने लगे। लोग मजाक में उन्हें ब्राह्मण कहने लगे, लेकिन इरफान को इससे कभी बुरा नहीं लगा। उन्होंने इसे अपनी पहचान का हिस्सा माना।


इंसानियत का महत्व

इरफान खान हमेशा इंसानियत को धर्म से ऊपर मानते थे। उनके लिए एक अच्छा इंसान होना सबसे महत्वपूर्ण था। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसके नाम या धर्म से। यही कारण था कि हर धर्म और वर्ग के लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते थे।


इरफान ने अपने करियर की शुरुआत टीवी से की थी। छोटे पर्दे पर काम करने के बाद, उन्होंने फिल्म उद्योग में कदम रखा और धीरे-धीरे बॉलीवुड के सबसे विश्वसनीय अभिनेताओं में से एक बन गए। उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए और हर बार खुद को साबित किया।