एआर रहमान का 59वां जन्मदिन: संगीत की दुनिया में उनकी यात्रा
एआर रहमान, भारतीय संगीत के एक प्रतिष्ठित नाम, आज अपने 59वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनके जीवन की यात्रा संघर्ष और जुनून से भरी हुई है। तमिलनाडु में जन्मे रहमान ने संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और कई पुरस्कार जीते, जिनमें ऑस्कर भी शामिल हैं। इस लेख में हम उनके प्रारंभिक जीवन, करियर की शुरुआत, और संगीत में उनके योगदान के बारे में जानेंगे।
| Jan 6, 2026, 12:56 IST
जन्मदिन की शुभकामनाएं
प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार और कंपोजर एआर रहमान आज, 06 जनवरी को अपने 59वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। एआर रहमान न केवल एक उत्कृष्ट संगीतकार हैं, बल्कि वे उस जुनून और संघर्ष का प्रतीक भी हैं, जिसने उन्हें विश्व के सबसे प्रतिष्ठित म्यूजिक आइकनों में स्थान दिलाया। उन्होंने कई फिल्मों में गाने गाए हैं और अपनी अद्भुत संगीत रचनाओं से दर्शकों का दिल जीता है। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...
परिवार और प्रारंभिक जीवन
एआर रहमान का जन्म 06 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ। उनका जन्म नाम दिलीप कुमार था। एक बार उनकी बहन की गंभीर बीमारी के दौरान एक पीर की दुआओं से उन्हें राहत मिली, जिसके बाद उनके परिवार ने इस्लाम धर्म अपनाया। इस प्रकार, दिलीप कुमार का नाम बदलकर अल्लाह रखा रहमान रख दिया गया।
संगीत में करियर की शुरुआत
15 साल की उम्र में, एआर रहमान को स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकि उनकी उपस्थिति कम थी। परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने इलैयाराजा के म्यूजिक ट्रिप में कीबोर्ड प्लेयर के रूप में काम करना शुरू किया। यहीं से उनके पेशेवर करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद, उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप भी मिली।
प्रारंभिक कमाई
1984 में, एआर रहमान ने प्रसिद्ध संगीतकार रमेश नायडू के साथ काम करना शुरू किया, जहां उनकी दैनिक कमाई केवल 100-200 रुपए थी। यहीं से उनके संघर्ष की असली कहानी शुरू हुई। हालांकि, लोग मानते हैं कि उनकी पहली फिल्म 'रोजा' थी, लेकिन उनका डेब्यू 1992 में आई फिल्म 'योधा' से हुआ था। 'रोजा' ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
ऑस्कर की ओर यात्रा
फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' का गाना 'जय हो' पहले फिल्म 'युवराज' के लिए लिखा गया था। इस गाने ने एआर रहमान को दो ऑस्कर दिलाए। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म 'ताल' के दौरान सुभाष घई ने एआर रहमान के ऑस्कर जीतने की घोषणा की थी, लेकिन तब एआर रहमान ने इसे मजाक में लिया था।
संगीत की रचना
एआर रहमान को रात के सन्नाटे में संगीत रचना करना पसंद है और वे खुद को स्टूडियो में पूरी तरह से काम में डुबो देते हैं। टेक्नोलॉजी के प्रति उनका लगाव आज भी उनके संगीत में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
