क्या कुत्तों की तुलना में पुरुषों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया? दिव्या स्पंदना का बयान चर्चा में
दिव्या स्पंदना का विवादास्पद बयान
नई दिल्ली: पूर्व सांसद और कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री दिव्या स्पंदना, जिन्हें राम्या के नाम से भी जाना जाता है, अपने हालिया बयान के कारण एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका बयान आवारा कुत्तों की सुरक्षा और आम जनता की सुरक्षा के बीच के विवाद से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राम्या ने जो तुलना की, उसे कई लोगों ने 'पुरुष विरोधी' करार दिया है, जिसके चलते उन पर आलोचनाओं की बौछार हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का संदर्भ
7 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों पर सुनवाई हो रही थी। यह सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ द्वारा की जा रही थी। अदालत में यह मुद्दा उठाया गया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने चिंता व्यक्त की कि यह पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है कि कौन सा कुत्ता कब आक्रामक हो सकता है। केवल काटने की घटनाएं ही नहीं, बल्कि सड़कों पर दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों के साथ गंभीर हादसे भी हो रहे हैं। कोर्ट की टिप्पणी का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा के पहलू को उजागर करना था।
विवाद की शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद, राम्या ने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की। वह लंबे समय से पशु अधिकारों की समर्थक रही हैं और आवारा कुत्तों के संरक्षण की बात करती रही हैं। अपनी पोस्ट में उन्होंने अदालत के तर्क को आधार बनाते हुए पुरुषों की तुलना कर दी। उन्होंने लिखा कि जैसे इंसान के दिमाग को पहले से नहीं पढ़ा जा सकता कि कौन गंभीर अपराध करेगा, उसी तरह यह मान लेना कि कोई कुत्ता खतरनाक है, सही नहीं है। इसी तुलना ने विवाद को जन्म दिया।
लोगों की प्रतिक्रिया
राम्या का उद्देश्य यह बताना था कि केवल अनिश्चितता के आधार पर किसी पूरे समूह को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना था कि अगर यह तर्क कुत्तों पर लागू किया जाए, तो वही सोच इंसानों पर भी लागू हो सकती है, जो खतरनाक है। हालांकि, पुरुषों से की गई तुलना कई लोगों को नागवार गुजरी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे गैर-जरूरी और अपमानजनक बताया। कुछ लोगों का कहना था कि आवारा कुत्तों के मुद्दे को उठाने के लिए इस तरह की तुलना करना ठीक नहीं है।
समर्थन और विरोध का मिश्रण
जहां राम्या की आलोचना हो रही है, वहीं कुछ लोग उनके समर्थन में भी सामने आए हैं। समर्थकों का तर्क है कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है और उनका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि एक सिद्धांत समझाना था। दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, खासकर जब मामला संवेदनशील हो।
बढ़ती बहस का प्रभाव
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर आवारा कुत्तों की समस्या, सार्वजनिक सुरक्षा और अभिव्यक्ति की सीमाओं जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राम्या का बयान अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं रह गया, बल्कि यह समाज में चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है।
