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गुजराती फिल्म 'लालो: कृष्ण सदा सहायते' ने बॉक्स ऑफिस पर मचाई धूम, जानें इसकी कहानी

गुजराती फिल्म 'लालो: कृष्ण सदा सहायते' ने बिना किसी बड़े सितारे और भारी प्रचार के बॉक्स ऑफिस पर अद्भुत सफलता हासिल की है। इस फिल्म ने 50 लाख रुपये के बजट में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। इसकी कहानी एक साधारण रिक्शा चालक की है, जो भगवान कृष्ण से मदद मांगता है। फिल्म की सादगी और भावनात्मक गहराई इसे खास बनाती है। जानें इस फिल्म की कहानी, इसकी तुलना अन्य सफल फिल्मों से और इसके मुख्य कलाकारों के बारे में।
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गुजराती फिल्म 'लालो: कृष्ण सदा सहायते' ने बॉक्स ऑफिस पर मचाई धूम, जानें इसकी कहानी

एक अनोखी सफलता की कहानी


जब हिंदी सिनेमा में बड़ी फिल्मों की चर्चा हो रही थी, तब एक छोटी गुजराती फिल्म ने चुपचाप एक नया इतिहास रच दिया। बिना किसी बड़े सितारे और भारी प्रचार के, 'लालो: कृष्ण सदा सहायते' ने सीमित बजट में ही ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर का खिताब हासिल कर लिया। इस फिल्म की सफलता की खबर अब हिंदी दर्शकों तक पहुंची है, क्योंकि यह 9 जनवरी को हिंदी में रिलीज होने जा रही है।


बजट और कमाई का अद्भुत आंकड़ा

इस फिल्म का बजट केवल 50 लाख रुपये है, लेकिन इसने विश्वभर में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। 10 अक्टूबर 2025 को गुजराती में रिलीज होने के बाद, यह फिल्म लगभग 90 दिनों तक दर्शकों को सिनेमाघरों में खींचती रही। IMDb पर इसे 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाती है।


दिल को छू लेने वाली कहानी

'लालो: कृष्ण सदा सहायते' एक भावनात्मक और आध्यात्मिक कहानी है। फिल्म का नायक लालो एक साधारण रिक्शा चालक है, जो पर्यटकों को घुमाकर अपना जीवन यापन करता है। एक दिन, वह एक फार्महाउस में फंस जाता है, जहां से निकलने की उसकी हर कोशिश विफल होती है। खाने-पीने की समस्याएं और अकेलापन उसे तोड़ने लगता है।


परिवार की चिंता और भगवान का सहारा

लालो के परिवार वाले उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराते हैं, लेकिन उसका कोई पता नहीं चलता। इस कठिनाई में, वह भगवान कृष्ण से मदद मांगता है, और उसे कृष्ण का मार्गदर्शन मिलता है, जो उसकी सोच और जीवन की दिशा को बदल देता है।


कांतारा और 12वीं फेल से तुलना

इस फिल्म की तुलना 'कांतारा' से की जा रही है, जिसमें आस्था और दिव्य शक्ति का महत्वपूर्ण स्थान है। '12वीं फेल' की तरह, यह आम आदमी के संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी भी प्रस्तुत करती है। हालांकि, 'लालो' की प्रस्तुति सरल और सच्ची है।


सादगी की ताकत

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी है। न तो भव्य सेट हैं और न ही भारी वीएफएक्स, सब कुछ वास्तविकता से जुड़ा हुआ है। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी की भावनाओं को और गहराई देता है। फिल्म की शूटिंग स्थानीय स्थानों पर शांति से की गई थी, और स्थानीय लोगों को बताया गया कि यह एक प्री-वेडिंग शूट है।


फिल्म की जानकारी

नाम: लालो: कृष्ण सदा सहायते
जॉनर: गुजराती ड्रामा, डिवोशनल
अवधि: 2 घंटे 15 मिनट
निर्देशक: अंकित सखिया
कलाकार: करण जोशी, रीवा राछ, श्रुहद गोस्वामी