गुरु रंधावा का 34वां जन्मदिन: जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ
गुरु रंधावा, जो आज 34 साल के हो गए हैं, ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। पंजाब के गुरदासपुर में जन्मे गुरु ने अपने संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक की यात्रा में कई हिट गाने दिए हैं। जानें उनके जीवन की कुछ रोचक बातें और कैसे उन्होंने अपने करियर में सफलता हासिल की।
Aug 30, 2025, 11:25 IST
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गुरु रंधावा का जन्मदिन
प्रसिद्ध गायक गुरु रंधावा, जो अपने शानदार पार्टी गानों और आकर्षक लुक्स के लिए जाने जाते हैं, आज 30 अगस्त को अपना 34वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने पंजाबी और बॉलीवुड संगीत में अपनी एक खास पहचान बनाई है। उनके हर गाने को दर्शकों का भरपूर प्यार मिलता है। हालांकि, उनके करियर की शुरुआत में उन्हें कुछ असफलताओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। आज तक, गुरु रंधावा ने कई हिट गाने दिए हैं। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
गुरु रंधावा का जन्म 30 अगस्त 1991 को पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ। उनका पूरा नाम गुरुशरणजोत सिंह रंधावा है। उन्होंने दिल्ली से MBA की डिग्री प्राप्त की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने स्टेज शो और पार्टियों में गाना गाकर की। लेकिन उनके करियर की असली शुरुआत 2012 में हुई, जब उनका पहला गाना 'सेम गर्ल' रिलीज हुआ। हालांकि, यह गाना सफल नहीं हो पाया, लेकिन गुरु ने अपनी मेहनत जारी रखी।
संगीत करियर की शुरुआत
2013 में, गुरु रंधावा ने अपने दूसरे गाने के साथ वापसी की और अपनी पहली एलबम 'पैग वन' लॉन्च की। इसके बाद उन्होंने कई गाने रिलीज किए, लेकिन वे ज्यादा सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि उनके भाई ने इस एलबम को लॉन्च करने में आर्थिक सहायता की थी।
गुरु का संघर्ष लगभग दो साल तक चला। इसके बाद, उन्होंने एक प्रसिद्ध म्यूजिक कंपनी के साथ जाने-माने रैपर बोहेमिया के साथ 'पटोला' गाना गाया। इस गाने ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और वह रातों-रात स्टार बन गए। यह गाना 2015 में रिलीज हुआ और इसे बेस्ट पंजाबी सॉन्ग का खिताब भी मिला। आज भी यह गाना लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
'पटोला' की सफलता के बाद, गुरु रंधावा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लगातार सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए कई पंजाबी और हिंदी फिल्मों के गाने गाए हैं, जैसे 'हाई रेटेड गबरू', 'कुछ तो मुझ में कमी थी', 'दारु वरगी', 'रात कमल है', और 'बन जा रानी'।