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जावेद अख्तर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर साझा की अपनी राय

जावेद अख्तर ने हाल ही में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फिल्म 'धुरंधर' पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है और फिल्म निर्माताओं का कर्तव्य है कि वे सच को दर्शाएं। उनके विचार पश्चिम बंगाल की राजनीति और युवा पीढ़ी के भविष्य पर भी केंद्रित हैं। जानें उनके विचारों का महत्व और समाज के लिए उनका संदेश।
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जावेद अख्तर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर साझा की अपनी राय

जावेद अख्तर का अभिव्यक्ति पर विचार

प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने रविवार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सिनेमा के दृष्टिकोण पर अपने विचार साझा किए। कोलकाता में एक प्रमुख आभूषण ब्रांड द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद, उन्होंने फिल्म 'धुरंधर' से जुड़े विवादों और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर पत्रकारों से खुलकर चर्चा की।


जब उनसे हाल में आई फिल्म 'धुरंधर' को 'दुष्प्रचार' वाली फिल्म कहे जाने के बारे में पूछा गया, तो अख्तर ने कहा कि हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।


उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि 'दुष्प्रचार' वाली फिल्मों से आपका क्या तात्पर्य है। मुझे 'धुरंधर' बहुत पसंद आई, यह एक उत्कृष्ट फिल्म है।' उन्होंने यह भी कहा कि हर कहानी किसी न किसी दृष्टिकोण को दर्शाती है, लेकिन क्या कोई कहानी केवल इसलिए दुष्प्रचार बन जाती है क्योंकि उसका कथानक कुछ दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं है? सभी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।


अख्तर ने यह भी कहा कि हर फिल्म निर्माता का कर्तव्य है कि वह सच को दर्शाए।


पश्चिम बंगाल की राजनीति पर जावेद अख्तर की राय

जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के संभावित परिणामों के बारे में पूछा गया, तो अख्तर ने कहा, 'सरकारें आती-जाती रहती हैं; समाज को चलाने के लिए सरकार की आवश्यकता होती है। लेकिन बंगाल को उसके इतिहास और साहित्य के लिए जाना जाता है, जिसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।'


वर्ष 2014 में भाजपा के सत्ता में आने पर टिप्पणी करते हुए, अख्तर ने कहा कि बदलाव होना तय था। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी बदलाव अवांछनीय होते हैं और कभी-कभी वांछनीय। मेरा मानना है कि युवा पीढ़ी मेरी पीढ़ी से बेहतर है। वे इस समाज को कहीं बेहतर बनाएंगे।'


जावेद अख्तर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कला और राजनीति के मेल पर तीखी बहस चल रही है। उनकी टिप्पणियां न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करती हैं, बल्कि समाज को चुनावी शोर से ऊपर उठकर सांस्कृतिक मूल्यों पर ध्यान देने का संदेश भी देती हैं।