जीशु सेनगुप्ता: संघर्ष नहीं, जीवन का हिस्सा है ऑटो से यात्रा
मुंबई: सपनों का शहर
मुंबई: मायानगरी को 'सपनों का शहर' कहा जाता है, जहां हर साल हजारों लोग उज्ज्वल भविष्य की तलाश में आते हैं। इनमें से कई लोग अपने गृह राज्य में पहले से अनुभव और कौशल प्राप्त करते हैं, ताकि मुंबई के कठिन संघर्षों का सामना कर सकें। अभिनेता जीशु सेनगुप्ता की कहानी भी इसी तरह की है।
बॉलीवुड में कदम
जीशु ने हाल ही में एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में कहा कि बॉलीवुड में प्रवेश करना उनके लिए उतना कठिन नहीं था, जितना कि आमतौर पर समझा जाता है। वे बंगाली सिनेमा के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं और कई प्रमुख निर्देशकों के साथ काम कर चुके हैं।
अनुभव का महत्व
उन्होंने बताया कि पहले वे कई बंगाली फिल्म निर्माताओं के साथ काम कर चुके थे, जिससे बॉलीवुड में उन्हें कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जीशु ने कहा, “मैंने प्रदीप सरकार, अनुराग बसु, सुजॉय घोष और सुजीत सरकार जैसे प्रसिद्ध बंगाली निर्देशकों के साथ काम किया है। ये लोग बॉलीवुड में भी जाने-माने हैं और उन्हें मेरे काम की जानकारी थी, इसलिए मेरे लिए चीजें आसान रहीं।”
संघर्ष का नजरिया
जीशु ने यह भी कहा कि वे सामान्य अनुभवों को संघर्ष नहीं मानते, बल्कि इसे जीवन का एक हिस्सा समझते हैं। उन्होंने कहा, “यह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। मैं ऑटो से यात्रा को संघर्ष नहीं मानता। लाखों लोग रोज इसी तरह यात्रा करते हैं। मैं इसे संघर्ष के रूप में नहीं देखता।”
प्रेरणा का स्रोत
अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उनके मैनेजर ने उन्हें बॉलीवुड में बड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मेरी टीम ने मुझे यहां तक पहुंचने के लिए बहुत प्रेरित किया, खासकर मेरी मैनेजर ने। उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना चाहिए। शुरू में मैं इसके लिए उत्सुक नहीं था, लेकिन अब मुझे खुशी है कि मैंने यह कदम उठाया।”
