थलापति विजय की फिल्म 'जन नायगन' की रिलीज टली, सेंसर बोर्ड पर उठे सवाल
फिल्म 'जन नायगन' की रिलीज में देरी
मुंबई: थलापति विजय की आगामी फिल्म 'जन नायगन', जो उनकी अंतिम फिल्म मानी जा रही है, अब पोंगल पर रिलीज नहीं होगी। यह राजनीतिक एक्शन थ्रिलर CBFC से प्रमाणपत्र न मिलने के कारण अटक गई है। मद्रास हाई कोर्ट में 9 जनवरी को इस मामले की सुनवाई हुई, जहां एक जज ने U/A 16+ सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया, लेकिन CBFC की अपील पर डिवीजन बेंच ने अंतरिम रोक लगा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
राम गोपाल वर्मा का सेंसर बोर्ड पर हमला
इस फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू और प्रकाश राज जैसे कलाकार शामिल हैं। यह विजय का राजनीतिक सफर शुरू करने से पहले का अंतिम प्रोजेक्ट है, जिससे फैंस में काफी उत्साह है। प्रोड्यूसर ने पहले ही रिलीज को टालने की घोषणा की और फैंस से माफी मांगी, यह कहते हुए कि 'विजय को वह विदाई मिलनी चाहिए जो उन्होंने कमाई है।'
CENSOR BOARD is OUTDATED
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) January 9, 2026
Not in the context of just @Actor_Vijay ‘s #JanaNayagan ‘s censor issues but in an overall manner, it is truly foolish to think that the censor board is still relevant today
It has long outlived it’s purpose, but it’s being kept alive out of laziness…
इस विवाद पर प्रसिद्ध निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने X पर एक विस्तृत पोस्ट में CBFC को पुराना और अप्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ जन नायगन या विजय की बात नहीं है, बल्कि CBFC आज पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुका है। इसका उद्देश्य बहुत पहले समाप्त हो गया था, लेकिन उद्योग की आलस्य के कारण यह अभी भी जीवित है।'
सिस्टम पर सवाल उठाने की आवश्यकता
राम गोपाल वर्मा ने आगे कहा कि आज के डिजिटल युग में 12 साल का बच्चा आतंकवादी वीडियो देख सकता है, 9 साल का बच्चा पोर्नोग्राफी देख सकता है, और यूट्यूब पर गाली-गलौज भरे वीडियो उपलब्ध हैं। ऐसे में एक फिल्म में एक शब्द काटना या सिगरेट को धुंधला करना समाज की सुरक्षा नहीं करेगा, यह हास्यास्पद है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से इस सिस्टम पर सवाल उठाने का आग्रह किया, न कि हर फिल्म पर अलग-अलग शोर मचाने का।
CBFC की कार्रवाई पर आलोचना
इसी मुद्दे पर निर्देशक मारी सेल्वराज ने भी CBFC की कार्रवाई को 'खुला अन्याय' करार दिया। उन्होंने X पर तमिल में लिखा, 'जन नायगन के खिलाफ सेंसर बोर्ड की कार्रवाई स्पष्ट अन्याय है। हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए ताकि लोकतंत्र और रचनात्मक स्वतंत्रता पर फैल रहे डर को समाप्त किया जा सके।'
यह विवाद केवल जन नायगन तक सीमित नहीं है, क्योंकि इसी समय सिवकार्थिकेयन की पराशक्ति को भी CBFC से कई कट्स के बाद मंजूरी मिली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सेंसरशिप के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, यह मामला सेंसर बोर्ड की प्रासंगिकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। क्या CBFC को अब बदलाव की आवश्यकता है? अगली सुनवाई में क्या निर्णय आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
