द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो: बच्चों के लिए एक अद्भुत फिल्म अनुभव
द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन एक नई बच्चों की फिल्म है जो दर्शकों को एक अद्भुत और मजेदार अनुभव प्रदान करती है। यह कहानी 11 वर्षीय दीपू की है, जो अपने दादा को एक सुपरहीरो बताता है। फिल्म में जैकी श्रॉफ का किरदार दिल को छू लेने वाला है, और बच्चों की मासूमियत के साथ यह फिल्म एक नई दिशा में मनोरंजन का अनुभव देती है। जानें इस फिल्म में क्या खास है और क्यों यह बच्चों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
| May 29, 2026, 15:48 IST
फिल्म का परिचय
आज सिनेमाघरों में मनीष सैनी द्वारा निर्देशित फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो – एलियंस का आगमन' प्रदर्शित हुई है। यह फिल्म दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जिसे वर्तमान बॉलीवुड ने लगभग भुला दिया है। इस समय की हिंसक और तेज-तर्रार एक्शन फिल्मों के बीच, यह फिल्म यह याद दिलाती है कि बच्चों के लिए शुद्ध और मासूम मनोरंजन की आवश्यकता है। एलियंस, सुपरहीरो और स्कूली बच्चों की कल्पनाओं पर आधारित यह फिल्म थोड़ी अटपटी और बिखरी हुई है, लेकिन इसका दिल पूरी तरह से भारतीय और पुराने जमाने जैसा प्यारा है।
फिल्म की कहानी
कहानी 11 वर्षीय दीपू (मिहिर गोडबोले) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक नए शहर में आता है। नए दोस्तों को प्रभावित करने के लिए, दीपू एक मनगढ़ंत कहानी सुनाता है कि उसके दादा (जैकी श्रॉफ) असल में एक गुप्त सुपरहीरो हैं, जो एलियंस के हमले को रोकने की तैयारी कर रहे हैं। यह बात तब रोमांचक मोड़ लेती है जब चमकीली पोशाकों में दो दिलचस्प किरदार (सहरश शुक्ला और कुमार सौरभ) एंट्री करते हैं और बच्चों की इस काल्पनिक कहानी को वास्तविकता में बदल देते हैं। इसके बाद बच्चे पूरी तरह 'मिशन मोड' में आ जाते हैं।
जैकी श्रॉफ का अद्वितीय किरदार
यह फिल्म न तो मार्वल की तरह वीएफएक्स से भरी है और न ही 'कृष' जैसी स्टाइलिश उड़ान वाली फिल्म है; बल्कि यह अपने देसी और कॉमिक-बुक अंदाज में सबसे ज्यादा चमकती है। जैकी श्रॉफ एक प्यारे दादा के रूप में हैं, जो एक ओर दुनिया को बचाने का दावा करते हैं, लेकिन दूसरी ओर एक साधारण छिपकली से डर जाते हैं, जिससे उनका 'सुपरहीरो' रौब पल भर में खत्म हो जाता है। जैकी ने इस किरदार को एक जिंदादिल और मजेदार रूप में पेश किया है।
स्टार परफॉर्मेंस और मुख्य आकर्षण
सशक्त बाल कलाकार: दीपू के किरदार में मिहिर गोडबोले ने अद्भुत आत्मविश्वास दिखाया है। उनके दोस्तों शिवंश चोरगे और जिहान होदार की मासूमियत और खेल के मैदान जैसी केमिस्ट्री दर्शकों का दिल जीत लेती है।
शानदार सपोर्टिंग कास्ट: प्रतीक स्मिता पाटिल ने एलियन के किरदार को सामान्य कैरिकेचर में बदलने के बजाय उसमें रहस्य और आकर्षण का बेहतरीन तड़का लगाया है। भाग्यश्री पटवर्धन का कैमियो और 'भारत माता की जय' वाला दृश्य फिल्म के ड्रामे को और रोमांचक बनाता है। वहीं दुर्गेश कुमार का बेतुका किरदार भी फिल्म के माहौल में सहजता से फिट बैठता है।
फिल्म का अनुभव
यह फिल्म न तो 'मार्वल' जैसी शानदार फ़िल्म है और न ही 'कृष' जैसी। असल में, यह तब सबसे अच्छी लगती है जब यह अपने देसी और कॉमिक-बुक वाले अंदाज़ को पूरी तरह से अपनाती है। एलियंस और बच्चों की हरकतें दर्शकों को हंसाने में सफल रहती हैं। जैकी श्रॉफ का किरदार दर्शकों को यह यकीन दिलाता है कि शायद यह दादा सच में रात के खाने के बाद एलियंस से लड़ता है।
फिल्म बचपन की यादों को छूती है, जैसे दादा-दादी द्वारा सुनाई गई कहानियाँ। यह फिल्म बच्चों, दोस्ती और एक साहसी दादाजी की मनोरंजक कहानी सुनाना चाहती है।
फिल्म की कमियाँ
हालांकि, फिल्म में कुछ खामियाँ भी हैं। दो घंटे से कम की अवधि के बावजूद, कुछ हिस्से खिंचे हुए लगते हैं। इसके अलावा, वयस्क दर्शकों को कभी-कभी अपने फोन में उलझने का मन कर सकता है।
फिर भी, 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' की सबसे बड़ी खूबी इसका अद्भुत अनुभव है। यह समझती है कि बच्चों को हमेशा परफ़ेक्शन की ज़रूरत नहीं होती; कभी-कभी उन्हें बस एक ऐसी कहानी चाहिए होती है, जो उन्हें यह यकीन दिला सके कि उनके आस-पास भी कुछ जादुई चीज़ें हो सकती हैं।
