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दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक्टर्स की पूजा: एक अनोखी परंपरा

दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक्टर्स को भगवान मानने की परंपरा एक अनोखी संस्कृति का हिस्सा है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, और अन्य राज्यों में, फिल्म सितारों को विशेष सम्मान दिया जाता है। प्रशंसक उनके लिए मंदिर बनवाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। यह परंपरा द्रविड़ आंदोलन से जुड़ी हुई है, जिसने पारंपरिक देवी-देवताओं की जगह फिल्म सितारों को स्थापित किया। जानें इस परंपरा के पीछे का इतिहास और क्यों लोग अपने पसंदीदा सितारों के प्रति इतनी भक्ति रखते हैं।
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दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक्टर्स की पूजा: एक अनोखी परंपरा

साउथ के एक्टर्स को भगवान मानने की परंपरा


नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि दक्षिण भारत के लोग अपने फिल्म सितारों को भगवान क्यों मानते हैं? यदि नहीं, तो आइए इस विषय पर चर्चा करते हैं। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में, फिल्मी सितारों को एक विशेष सम्मान दिया जाता है। यहाँ तक कि प्रशंसक अपने पसंदीदा सितारों की तस्वीरों पर माला चढ़ाते हैं और कई लोग तो उनके पोस्टरों पर दूध से अभिषेक भी करते हैं।


जब किसी अभिनेता की फिल्म रिलीज होती है, तो पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल होता है। कई प्रशंसकों ने अपने प्रिय सितारों के लिए मंदिर भी बनवाए हैं। इस तरह की दीवानगी शायद ही कहीं और देखने को मिलती है।


संस्कृति और इतिहास का गहरा संबंध

दक्षिण भारत में यह परंपरा उसकी संस्कृति और इतिहास से जुड़ी हुई है। काफी समय पहले, तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन ने नास्तिकता को बढ़ावा दिया, जिसके बाद फिल्म सितारों ने पारंपरिक देवी-देवताओं की जगह ले ली। द्रविड़ आंदोलन, जो 1925 के बाद सामाजिक सुधार और कट्टर नास्तिकता का प्रमुख आंदोलन माना जाता है, ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


द्रविड़ आंदोलन का उद्देश्य

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जाति और धार्मिक अंधविश्वास को समाप्त करना था। इसके विचारधारा के अनुसार, ईश्वर और धर्म ने गैर-ब्राह्मणों (द्रविड़ों) को गुलाम बना दिया है। इसीलिए, उन्होंने तर्कवाद को आधार बनाकर नास्तिकता का प्रचार किया। तमिलनाडु के प्रमुख नेता पेरियार ने कहा था कि 'ईश्वर नहीं है, जिसने ईश्वर का आविष्कार किया वह मूर्ख है।'


अभिनेता-राजनेताओं का प्रभाव

जब एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और एन.टी. रामाराव (NTR) जैसे अभिनेता-राजनेता मुख्यमंत्री बने, तो यह स्पष्ट हो गया कि उनकी पर्दे पर दिखाई देने वाली बहादुरी उनके नेतृत्व कौशल से कम नहीं है। इससे आम जनता उनके प्रति जुड़ाव महसूस करने लगी।


एक्टर्स के लिए मंदिरों का निर्माण


  • राजनीकांत: कर्नाटक के कोलार में उनके नाम पर एक मंदिर बनाया गया है। मदुरै में भी एक प्रशंसक ने अपने घर में अरुलमिगु श्री राजिनी कोविल स्थापित किया है।

  • समांथा रूथ प्रभु: हैदराबाद में उनके 36वें जन्मदिन पर प्रशंसकों ने मंदिर बनवाया था।

  • खुशबू: कोलवुड की पहली अभिनेत्री जिनके नाम पर तमिलनाडु में मंदिर बना, लेकिन विवाद के चलते उसे तोड़ दिया गया।

  • नागार्जुन: उनके प्रशंसकों ने 22 साल में उनके नाम का मंदिर बनवाया।

  • निधि अग्रवाल: उनके प्रशंसकों ने फरवरी 2021 में उनके लिए एक मूर्ति बनवाई थी।

  • हंसिका मोटवानी: उनके प्रशंसकों ने मदुरई में मंदिर बनाने की योजना बनाई थी।

  • नमिता: तमिलनाडु में उनके नाम पर कई मंदिर बने हैं।

  • पवन कल्याण: तेलुगु अभिनेता जिनके नाम पर मंदिर बनाए गए हैं।


अभिनेताओं के प्रति भक्ति का कारण

दक्षिण भारतीय फिल्मों में अक्सर अभिनेताओं को अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए दिखाया जाता है। इससे दर्शकों को विश्वास होता है कि वे भी उनके लिए ऐसा ही करेंगे। इसके अलावा, कई अभिनेता फिल्म रिलीज से पहले मंदिरों में जाकर अपनी आध्यात्मिक छवि को मजबूत करते हैं, जिससे उनकी भगवान जैसी छवि और भी प्रबल होती है।