दशावतार: ऑस्कर 2026 की दौड़ में शामिल होने वाली पहली मराठी फिल्म
दशावतार का ऐतिहासिक क्षण
मुंबई: मराठी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। निर्देशक सुबोध खानोलकर की फिल्म 'दशावतार' ऑस्कर 2026 की प्रतियोगिता में शामिल होने वाली पहली मराठी फिल्म बन गई है। यह उपलब्धि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है। फिल्म में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दिलीप प्रभावलकर की अदाकारी को पहले ही सराहा जा चुका है।
'दशावतार' की सफलता की कहानी
यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी और यह वर्ष 2025 की सबसे अधिक कमाई करने वाली मराठी फिल्मों में से एक बन गई। लगभग 5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 24 करोड़ रुपये की कमाई की। इसकी कहानी कोकण की लोक संस्कृति, दशावतार लोक नाट्य और अवैध खनन जैसे सामाजिक मुद्दों पर आधारित है। इसमें महेश मांजरेकर, भारत जाधव, सिद्धार्थ मेनन, प्रियदर्शिनी इंडलकर, और अभिनय बेर्डे जैसे कलाकार भी शामिल हैं।
निर्देशक की खुशी और टीम का जश्न
निर्देशक सुबोध खानोलकर ने इंस्टाग्राम पर अकादमी से प्राप्त ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा कर इस खुशी की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत का फल मिला है और यह दर्शाता है कि मराठी सिनेमा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह संभवतः पहली मराठी फिल्म है जो मुख्य श्रेणी में चयनित हुई है। यह फिल्म हजारों में से 150 से अधिक फिल्मों में एकमात्र मराठी फिल्म है और अकादमी स्क्रीनिंग रूम में प्रदर्शित होने वाली पहली मराठी फिल्म भी है।
टीम की मेहनत का फल
प्रोडक्शन हाउस जी स्टूडियोज ने भी सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। उन्होंने लिखा, 'लाल मिट्टी से जन्मी, परंपरा से संवारी, अब वैश्विक। दशावतार ऑस्कर की ओर बढ़ रही है।' ओशन फिल्म कंपनी ने इसे टीम की मेहनत और विश्वास का परिणाम बताया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 'दशावतार' स्वतंत्र सबमिशन के तहत सूची में आई है, जबकि भारत की आधिकारिक एंट्री बेस्ट इंटरनेशनल फीचर श्रेणी में 'होमबाउंड' है।
ऑस्कर नॉमिनेशंस की तारीख
दशावतार इस सूची में शामिल होने वाली दूसरी भारतीय फिल्म है। ऑस्कर नॉमिनेशंस 22 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे और पुरस्कार समारोह 15 मार्च 2026 को होगा। जीत या हार अलग बात है, लेकिन मराठी कहानियों का वैश्विक मंच पर पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह क्षेत्रीय सिनेमा के लिए नई उम्मीद जगाता है कि अच्छी सामग्री वाली फिल्में भाषा की बाधाओं को पार कर सकती हैं। मराठी उद्योग के लिए यह केवल शुरुआत है।
