दादी की शादी: बुजुर्गों की भावनाओं को छूने वाली एक संवेदनशील फिल्म
दादी की शादी एक संवेदनशील फिल्म है जो बुजुर्गों के अकेलेपन और उनकी इच्छाओं पर प्रकाश डालती है। यह फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि समाज की पुरानी धारणाओं पर भी सवाल उठाती है। नीतू कपूर और कपिल शर्मा जैसे कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी के साथ, यह फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है। जानें इस फिल्म की कहानी, निर्देशन और तकनीकी पहलुओं के बारे में।
| May 8, 2026, 16:15 IST
फिल्म की संक्षिप्त जानकारी
जब कोई फिल्म मानवीय संबंधों की जटिलताओं को सरलता से दर्शाती है, तो वह दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लेती है। आज, 8 मई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित 'दादी की शादी' एक ऐसी ही संवेदनशील फिल्म है, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज की पुरानी धारणाओं पर भी सवाल उठाती है। यह फिल्म न केवल दर्शकों का मनोरंजन करती है, बल्कि बुजुर्गों के अकेलेपन और उनकी इच्छाओं पर एक महत्वपूर्ण चर्चा भी शुरू करती है। इस फिल्म की विशेषता कपूर परिवार की तीन पीढ़ियों का एक साथ आना और रिद्धिमा कपूर साहनी का बहुप्रतीक्षित डेब्यू है।
कहानी: दादी का नया जीवन
फिल्म की शुरुआत शिमला की खूबसूरत वादियों से होती है, जहां विमला आहूजा (नीतू कपूर) अपने भव्य बंगले में अकेले समय बिता रही हैं। कहानी में तब मोड़ आता है जब विमला सोशल मीडिया पर अपनी दूसरी शादी का ऐलान करती हैं। यह खबर उनके बेटों और बेटी सुनैना (रिद्धिमा कपूर साहनी) के लिए एक बड़ा झटका होती है।
वहीं, विमला की पोती कनिका (सादिया ख़तीब) की सगाई दिल्ली के एक पंजाबी परिवार के टोनी कालरा (कपिल शर्मा) से होने वाली है। जैसे ही विमला की शादी की बात सामने आती है, सगाई टूट जाती है और पूरा परिवार विमला को रोकने के लिए शिमला पहुंचता है। यहां रिटायर्ड कर्नल थीरन देवराजन (आर. सरथकुमार) की एंट्री होती है, जो विमला के जीवनसाथी बनने वाले हैं। इसके बाद भावनाओं, कॉमेडी और ड्रामा का एक दिलचस्प सफर शुरू होता है।
दादी की शादी: निर्देशन और स्क्रीनप्ले
आशीष आर. मोहन ने एक साहसी और संवेदनशील विषय को चुना है। हमारे समाज में बुजुर्गों की दूसरी शादी को आज भी एक वर्जित विषय माना जाता है, लेकिन निर्देशक ने इसे बिना किसी उपदेश के सहजता से प्रस्तुत किया है। फिल्म का पहला भाग बहुत ही उत्साहजनक है। एक शोर-शराबे वाले पंजाबी परिवार और एक शांत दक्षिण भारतीय व्यक्ति (कर्नल थीरन) के बीच का टकराव पर्दे पर कॉमेडी और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण बनाता है। हालांकि, फिल्म की लंबाई (ढाई घंटे) थोड़ी अधिक लगती है। इंटरवल के बाद, कहानी कुछ स्थानों पर भावनाओं को दोहराती हुई लगती है, जिससे इसकी गति धीमी हो जाती है। फिर भी, निर्देशक की ईमानदारी सराहनीय है; उन्होंने भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया और कहानी को वास्तविकता से जोड़े रखा।
दादी की शादी: अभिनय
नीतू कपूर इस फिल्म की आत्मा हैं। उन्होंने विमला के किरदार को इतनी गहराई से निभाया है कि उनकी खामोशी में भी अकेलापन महसूस होता है। कपिल शर्मा ने इस फिल्म में एक सुखद सरप्राइज के रूप में उभरे हैं। उन्होंने अपनी कॉमेडी इमेज से हटकर एक गंभीर प्रदर्शन दिया है। सादिया ख़तीब अपनी ताजगी से फिल्म में जान डाल देती हैं, जबकि आर. सरथकुमार कर्नल के किरदार में एक अनोखा दबदबा दिखाते हैं।
रिद्धिमा कपूर साहनी ने अपने अभिनय में आत्मविश्वास का परिचय दिया है। उन्होंने एक ऐसी बेटी का किरदार निभाया है जो विदेश में रहती है और मुश्किल समय में अपने परिवार के साथ खड़ी रहती है। कपूर परिवार की सबसे छोटी सदस्य समारा साहनी ने अपनी छोटी भूमिका से सबका दिल जीत लिया। तीन पीढ़ियों (नीतू, रिद्धिमा और समारा) को एक साथ देखना एक ऐतिहासिक पल है।
दादी की शादी: तकनीकी पहलू
फिल्म के संवाद यथार्थवादी हैं और किसी फिल्मी ड्रामा जैसे नहीं लगते। इसका हास्य बहुत नैचुरल है। म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है। 'Senti' एक मजेदार ट्रैक है, जबकि 'Suno Na Dil' दिल को सुकून देने वाला गाना है। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के इमोशनल टोन को बनाए रखने में मदद करता है।
'दादी की शादी' एक ऐसी फिल्म है जिसे आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं। यह आपको हंसाएगी, थोड़ा रुलाएगी, और अंत में आपके चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाएगी। कुल मिलाकर, यह एक ताज़गी भरी फिल्म है, जो पुरानी रूढ़ियों को तोड़ती है।
फिल्म की रेटिंग
स्टार रेटिंग: 3.5/5
डायरेक्टर: आशीष आर. मोहन
मुख्य कलाकार: नीतू कपूर, कपिल शर्मा, रिद्धिमा कपूर साहनी, आर. सरथकुमार, सादिया ख़तीब
रिलीज़ डेट: 8 मई, 2026
