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दिव्या दत्ता ने पितृसत्तात्मक सोच पर उठाया सवाल, सिंगल रहने की बात की

दिव्या दत्ता ने हाल ही में सिंगल रहने, शादी और मातृत्व पर समाज की अपेक्षाओं पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति की कहानी अलग होती है और किसी को भी एक ही तराजू में नहीं तोलना चाहिए। दिव्या ने पितृसत्तात्मक सोच पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि समाज में तरक्की के बावजूद यह पुरानी सोच अभी भी कायम है। जानें उनके विचार और अनुभव इस विशेष बातचीत में।
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दिव्या दत्ता ने पितृसत्तात्मक सोच पर उठाया सवाल, सिंगल रहने की बात की

दिव्या दत्ता की बेबाक राय

प्रसिद्ध अभिनेत्री दिव्या दत्ता अपनी फिल्मों में जितनी प्रभावशाली हैं, उतनी ही वास्तविक जीवन में भी अपनी स्पष्टता और ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में, उन्होंने समाज की पुरानी पितृसत्तात्मक धारणाओं पर खुलकर चर्चा की।


एक विशेष बातचीत में, दिव्या ने सिंगल जीवन, विवाह और मातृत्व के बारे में समाज की अपेक्षाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की जिंदगी को एक ही पैमाने पर नहीं मापा जा सकता, क्योंकि हर किसी की कहानी अलग होती है।


जब दिव्या से पूछा गया कि आज के समय में सिंगल रहना कितना चुनौतीपूर्ण है और क्या समाज अब भी मानता है कि एक महिला शादी या बच्चों के बिना 'पूर्ण' नहीं होती, तो उन्होंने कहा कि चाहे वह किसी रिश्ते में हों या सिंगल, वह अपनी जिंदगी का आनंद लेती हैं और यही सबसे महत्वपूर्ण है।


उन्होंने आगे कहा, 'हर किसी की कहानी अलग होती है। यह सामान्य धारणा बनाना कि पार्टनर होना बेहतर है या सिंगल रहना, किसी के लिए भी सही नहीं है। जो आपके लिए सही है, वही सबसे अच्छा है। मेरे लिए यह सही है और मैं इससे संतुष्ट हूं।'


दिव्या ने यह भी कहा कि लोगों को दूसरों के जीवन के निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। अगर किसी को अच्छा साथी मिल गया है, तो यह उनके लिए सही है। अगर नहीं मिला, तो उन्हें वही करना चाहिए जो उन्हें सही लगे। किसी की जिंदगी को एक ही तराजू में नहीं तोलना चाहिए।


पितृसत्तात्मक सोच पर बात करते हुए, दिव्या ने कहा कि समाज में तरक्की के बावजूद यह पुरानी सोच अभी भी कायम है। शिक्षा का इससे कोई संबंध नहीं है, यह केवल एक मानसिकता है। हर व्यक्ति का सफर अलग होता है और उसे सम्मान मिलना चाहिए, न कि तुलना।