दिव्येंदु भट्टाचार्य का रंगभेद पर खुलासा: बॉलीवुड में भेदभाव का सामना
दिव्येंदु भट्टाचार्य का विवादास्पद बयान
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता दिव्येंदु भट्टाचार्य ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया है। फिल्मों और वेब सीरीज में अपनी पहचान बना चुके इस अभिनेता ने बताया कि उन्हें एक विज्ञापन से केवल इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उनकी त्वचा का रंग सांवला है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले उन्हें सूचित किया गया कि निर्माता काले अभिनेता को नहीं चाहते हैं।
शूटिंग से पहले बदलाव का कारण
दिव्येंदु ने बताया कि विज्ञापन के लिए कई दिनों से बातचीत चल रही थी और सब कुछ तय हो चुका था। लेकिन जब उन्होंने टीम से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनकी जगह किसी और को ले लिया गया है। जब उन्होंने कारण पूछा, तो उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि उनका रंग कारण है।
आत्मविश्वास पर असर नहीं
हालांकि, दिव्येंदु ने कहा कि इस घटना ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित नहीं किया। उन्होंने अपने व्यक्तित्व को लेकर संतोष व्यक्त किया और कहा कि यह दुखद है, लेकिन बदलाव तभी संभव है जब लोगों को शिक्षा दी जाए। उन्होंने इसे केवल फिल्म इंडस्ट्री की समस्या नहीं, बल्कि समाज की सोच से जुड़ी समस्या बताया।
कैरेक्टर एक्टर की परिभाषा पर सवाल
इंटरव्यू में दिव्येंदु ने बॉलीवुड में 'कैरेक्टर एक्टर' शब्द के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके जैसे कलाकारों को अक्सर इस श्रेणी में रखा जाता है, जबकि मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों को ऐसा टैग नहीं मिलता। उनका मानना है कि हर अभिनेता किसी न किसी किरदार को निभा रहा होता है, इसलिए इस तरह की श्रेणियां बनाना उचित नहीं है।
दिव्येंदु का करियर
दिव्येंदु भट्टाचार्य ने पिछले दो दशकों में कई फिल्मों में काम किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 'मानसून वेडिंग' में छोटे रोल से की थी। इसके बाद अनुराग कश्यप की फिल्म 'Dev D' में उनके निभाए गए 'चुन्नी बाबू' के किरदार ने उन्हें पहचान दिलाई। उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं और उन्हें इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित सहायक कलाकारों में गिना जाता है।
सोशल मीडिया पर बहस
दिव्येंदु के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर रंगभेद और कास्टिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई यूजर्स ने उनके समर्थन में पोस्ट किए हैं और कहा है कि आज भी इंडस्ट्री में रंग और लुक्स के आधार पर भेदभाव जारी है।
