परम् सुंदरी: एक दिल को छू लेने वाली रोमांटिक फिल्म की समीक्षा
परम् सुंदरी एक दिल को छू लेने वाली रोमांटिक फिल्म है जो तकनीक और सच्चे प्यार के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और जान्हवी कपूर की केमिस्ट्री दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। तुषार जलोटा के निर्देशन में, यह कहानी न केवल रोमांस बल्कि रिश्तों की गहराई को भी उजागर करती है। फिल्म का संगीत और लोकेशन्स इसे और भी खास बनाते हैं। अंत में, यह फिल्म यह संदेश देती है कि सच्चा प्यार कभी भी डेटा एनालिसिस नहीं हो सकता।
Aug 29, 2025, 16:27 IST
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फिल्म की कहानी
आज के युग में हर चीज़ तकनीक पर निर्भर हो गई है, चाहे वह काम हो, दोस्ती हो या प्यार। लेकिन 'परम् सुंदरी' यह दर्शाती है कि किसी ऐप की उन्नति के बावजूद, सच्चे दिल की धड़कनों को कोई एल्गोरिदम नहीं समझ सकता। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है।
दिल्ली का महत्वाकांक्षी युवक परम् (सिद्धार्थ मल्होत्रा) नए स्टार्टअप्स में निवेश करने का शौक रखता है। उसका नवीनतम प्रोजेक्ट एक डेटिंग ऐप है, जो दावा करता है कि सही सोलमेट केवल प्रोफाइल बिहेवियर के आधार पर खोजा जा सकता है। उसके पिता (संजय कपूर) उसे पहले खुद ऐप का उपयोग करने की शर्त रखते हैं।
यह ऐप उसे सुंदरी (जान्हवी कपूर) से मिलवाता है, जो केरल की एक साधारण लेकिन मजबूत लड़की है। दोनों की पृष्ठभूमि भिन्न है, लेकिन जब परम् उसे मिलने के लिए केरल जाता है, तो कहानी तकनीक से हटकर दिलों की गहराई में चली जाती है।
निर्देशन और अभिनय
तुषार जलोटा ने कहानी को इस तरह से प्रस्तुत किया है कि यह उपदेशात्मक नहीं, बल्कि अनुभवात्मक लगती है। उनकी विशेषता यह है कि उन्होंने प्यार को डिजिटल 'मैचिंग' से निकालकर मानवीय भावनाओं तक पहुँचाया है। सिद्धार्थ मल्होत्रा परम् के किरदार में आकर्षक हैं, कभी जिज्ञासु तो कभी भावुक। वहीं, जान्हवी कपूर का किरदार फिल्म का दिल है। सुंदरी के रूप में वह स्वाभाविक और प्रभावशाली नजर आती हैं। दोनों की केमिस्ट्री धीरे-धीरे विकसित होती है, जो फिल्म को खूबसूरत बनाती है।
सहायक कलाकार
संजय कपूर हल्के-फुल्के मजाक के साथ गंभीरता का भी रंग भरते हैं। मंजोत सिंह अपनी कॉमिक टाइमिंग से हंसी लाते हैं, और इनायत वर्मा मासूमियत से फिल्म में मिठास घोल देती हैं। सुंदरी का परिवार (रंजी पनिकर और सिद्धार्थ शंकर) कहानी को गहराई प्रदान करता है, जिससे यह केवल रोमांस नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई भी दर्शाता है।
संगीत और लोकेशन्स
दिल्ली की चमक और केरल की हरियाली का कॉन्ट्रास्ट देखने लायक है। हर लोकेशन अपने आप में एक किरदार बन जाती है। फिल्म का संगीत, विशेषकर 'चांद कागज़ का', दिल को छू लेने वाला है, जबकि 'भीगी साड़ी' में जुनून है और 'सुंदरी के प्यार में' दिलकश रोमांस का प्रतीक बन चुका है।
निष्कर्ष
परम् सुंदरी अंत में यही संदेश देती है कि प्यार कोई डेटा एनालिसिस नहीं है। यह दिल की धड़कनों में छुपा एहसास है, जिसे न कोई ऐप माप सकता है और न कोई तकनीक समझ सकती है।
यह फिल्म एक फील-गुड रोमांस है जो आपको थियेटर से मुस्कुराते हुए, हल्के मन और गीली आंखों के साथ बाहर भेजेगी। कुल मिलाकर, परम् सुंदरी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यह याद दिलाने वाला खूबसूरत सफर है कि सच्चा प्यार हमेशा दिल से जन्म लेता है और दिल के कोड को कोई मशीन कभी डिकोड नहीं कर सकती।
फिल्म की जानकारी
निर्देशक: तुषार जलोटा
कलाकार: सिद्धार्थ मल्होत्रा, जान्हवी कपूर, रंजी पनिकर, सिद्धार्थ शंकर, मंजोत सिंह, संजय कपूर, इनायत वर्मा
अवधि: 136 मिनट
रेटिंग: (4/5)