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प्रकाश झा का जन्मदिन: सिगरेट छोड़ने का अनोखा किस्सा और मां की यादें

प्रकाश झा, बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, आज 74 वर्ष के हो गए हैं। इस अवसर पर, उन्होंने अपनी मां की यादों और सिगरेट छोड़ने के अनोखे तरीके को साझा किया। जानें कैसे उनकी मां ने उन्हें सिगरेट पीने से रोका और उनके पिता के साथ उनके गहरे संबंध के बारे में। इस लेख में उनके जीवन के कुछ दिलचस्प पहलुओं पर चर्चा की गई है।
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प्रकाश झा का जन्मदिन: सिगरेट छोड़ने का अनोखा किस्सा और मां की यादें

प्रकाश झा का जन्मदिन


मुंबई: प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रकाश झा आज अपने 74वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। इस उम्र में भी उनका सिनेमा के प्रति जुनून बरकरार है। सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक खास पहचान दिलाई है। उनकी निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प है। एक साक्षात्कार में, उन्होंने अपनी मां के साथ बिताए समय की कुछ यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब उनका जन्म हुआ, तब उनकी मां की उम्र केवल 16 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में मां बनने के बावजूद, उनकी मां का व्यक्तित्व बहुत मजबूत और स्पष्ट था।


मां का सख्त लेकिन प्यार भरा अंदाज

प्रकाश झा ने कहा कि उनकी मां हमेशा स्पष्टता से अपनी बात रखती थीं। अगर उन्हें लगता कि उनका बेटा गलत दिशा में जा रहा है, तो वह उसे सीधे और सख्त तरीके से समझाती थीं।


सिगरेट छोड़ने का अनोखा तरीका

एक दिलचस्प किस्से में, प्रकाश झा ने बताया कि जब उन्हें सिगरेट पीने की आदत लग गई थी, तो उनकी मां ने इसे सुधारने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। वह खुद सिगरेट पीने के लिए माचिस मांगती थीं, ताकि उनके बेटे को शर्म आए और वह अपनी आदत छोड़ दे। यह उनका देसी लेकिन प्रभावी तरीका था। प्रकाश झा ने माना कि उनकी मां का यह सख्त व्यवहार उनके लिए चिंता और प्यार का प्रतीक था।


पिता के साथ गहरा संबंध

प्रकाश झा का अपने पिता के साथ भी गहरा संबंध रहा है। उनका जन्म 1952 में बिहार में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षित और समझदार व्यक्ति थे। प्रकाश झा ने बताया कि उनके पिता आज भी पटना में रहते हैं और वह उनसे दिन में कई बार बात करते हैं। उनके पिता अनुशासित जीवन जीते हैं और आज भी ध्यान करते हैं। प्रकाश झा का मानना है कि उनके व्यक्तित्व में संतुलन और धैर्य उनके पिता से ही आया है।


सिनेमा की दुनिया में कदम

स्कूल की पढ़ाई के बाद, प्रकाश झा ने दिल्ली में कॉलेज की शिक्षा पूरी की और फिर फिल्मों के सपने के साथ मुंबई आए। यहां उन्होंने अपने दृष्टिकोण के साथ सिनेमा में कदम रखा और एक अलग पहचान बनाई। अब तक, उन्होंने 38 से अधिक फिल्मों में काम किया है, जिनमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्में शामिल हैं, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।