भारत पर अमेरिकी टैरिफ: ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी का असर
जेफ्रीज की नई रिपोर्ट में भारत पर अमेरिकी टैरिफ के पीछे के कारणों का खुलासा किया गया है। इसमें ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी और भारत-अमेरिका के बीच के संबंधों में गिरावट का जिक्र है। जानें कैसे ये घटनाक्रम दोनों देशों के बीच के रणनीतिक संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं।
Aug 30, 2025, 16:52 IST
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अमेरिका की रिपोर्ट में भारत पर टैरिफ का खुलासा
जेफ्रीज, एक अमेरिकी वित्तीय कंपनी, ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत पर लगाए गए टैरिफ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने भारत पर 50% का टैरिफ लगाया है, जो राजनीतिक और आर्थिक दोनों कारणों से प्रेरित है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाकर अपनी व्यक्तिगत नाराजगी व्यक्त की है। ट्रंप का यह गुस्सा उस समय की घटनाओं से जुड़ा है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच मई में तनाव बढ़ा था। भारत ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई।
भारत और अमेरिका के संबंधों में गिरावट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका के अन्य व्यापारिक साझेदारों की तुलना में भारत पर सबसे अधिक टैरिफ लगाया गया है। इससे दोनों देशों के बीच के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा है। भारत को पहले अमेरिका का 'मेजर डिफेंस पार्टनर' माना जाता था, लेकिन ट्रंप के हालिया बयानों और नीतियों ने इस रिश्ते को संकट में डाल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में हुई घटनाओं ने इस गिरावट को और बढ़ाया है।
कश्मीर पर ट्रंप की मध्यस्थता की कोशिश
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इस मामले में किसी की मध्यस्थता नहीं चाहता। ट्रंप ने 2019 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान कहा था कि अगर भारत और पाकिस्तान सहमत होते हैं, तो वह इस मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह कश्मीर को अपने तरीके से ही संभालेगा।
ट्रंप और मोदी की संभावित मुलाकात
सितंबर 2024 में, जब मोदी अमेरिका का दौरा कर रहे थे, तब भारतीय वार्ताकारों ने ट्रंप से मुलाकात की योजना बनाई थी। हालांकि, ट्रंप की प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस के अभियान ने इस मुलाकात को अस्वीकार कर दिया। भारतीय पक्ष ने ट्रंप से मिलने से इसलिए मना किया क्योंकि वह केवल एक उम्मीदवार से मिलना नहीं चाहते थे।
ट्रंप का नोबेल पुरस्कार का सपना
ट्रंप को विश्वास है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को समाप्त किया, जबकि भारत का कहना है कि इस दौरान मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। ट्रंप का मानना है कि उनकी भूमिका को नकारा जाना उन्हें निराश करता है। वह शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए भी इच्छुक हैं।
ट्रंप की रणनीति और मोदी का रुख
ट्रंप ने जी7 बैठक के दौरान मोदी से मिलने से पहले अमेरिका लौटने का निर्णय लिया, ताकि वह मीडिया के सवालों से बच सकें। उन्होंने मोदी को अमेरिका बुलाने का प्रयास किया, लेकिन भारत को डर था कि ट्रंप उन्हें पाकिस्तान के आर्मी चीफ के सामने लाने की कोशिश कर सकते हैं।
मोदी का ठुकराना
ट्रंप ने कई बार मोदी से संपर्क किया, लेकिन मोदी ने उनके अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। यदि मोदी को एक कमजोर देश के साथ युद्धविराम के लिए ट्रंप के दबाव में झुकते हुए देखा गया, तो इसका उन्हें घरेलू स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।