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भारत सरकार ने 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' डॉक्यूमेंट्री पर लगाया बैन

भारत सरकार ने 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' नामक डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर बैन लगा दिया है, जो गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित थी। यह निर्णय पंजाब पुलिस की चिंताओं के बाद लिया गया, जिसमें कहा गया था कि यह सीरीज अपराधियों को महिमामंडित कर सकती है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष ने भी इस सीरीज का विरोध किया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और सरकार के कदमों के बारे में।
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भारत सरकार ने 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' डॉक्यूमेंट्री पर लगाया बैन

सरकार का सख्त कदम


मुंबई: पंजाब में विवाद पैदा करने वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' पर भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस सीरीज पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह जानकारी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका के दौरान केंद्र सरकार ने दी।


OTT प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी रिलीज

यह डॉक्यूमेंट्री गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित थी और इसे 27 अप्रैल 2026 को ZEE5 पर प्रसारित किया जाना था। लेकिन रिलीज से पहले ही विवाद उत्पन्न हो गया था। पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने मंत्रालय को पत्र लिखकर सीरीज और उसके ट्रेलर पर रोक लगाने की मांग की थी।


रिलीज पर रोक का कारण

पुलिस का कहना है कि यह सीरीज अपराधियों को महिमामंडित कर रही है, जिससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और पंजाब में कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग ने भी इस सीरीज का विरोध किया और इसे पंजाब, पंजाबियों और पंजाबियत का अपमान बताया। उन्होंने ZEE5 को कानूनी नोटिस भेजा और हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।


उन्होंने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह ने सिद्धू मूसेवाला समेत कई युवाओं की हत्या की है। ऐसे में उनकी कहानी को डॉक्यूमेंट्री के रूप में प्रस्तुत करना युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि मंत्रालय ने तथ्यों की जांच के बाद सीरीज पर बैन लगाने का निर्णय लिया है। इसमें तथ्यात्मक गलतियों और सामग्री से जुड़ी चिंताओं को आधार बनाया गया है।


सरकार का दृष्टिकोण

सरकार का मानना है कि ऐसी सामग्री अपराध को बढ़ावा दे सकती है और आम जनता में गलत संदेश फैला सकती है। यह विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि पंजाब पुलिस ने पहले भी हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया था। कोर्ट पहले गैंगस्टरों से जुड़ी जेल के अंदर की इंटरव्यू जैसी सामग्री पर सख्ती दिखा चुका है। पुलिस ने IT एक्ट की धारा 69A के तहत सीरीज को ब्लॉक करने की अपील की थी।


मेकर्स ने पहले कहा था कि सीरीज अपराध की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम और परिस्थितियों को समझने की कोशिश है, लेकिन विरोध इतना बढ़ गया कि सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैन के बाद ZEE5 या मेकर्स क्या कदम उठाएंगे, लेकिन केंद्र सरकार के इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि तथ्यों की सच्चाई और सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता दी जा रही है।