भारतीय पौराणिक कथाओं का नया दृष्टिकोण: 'द फॉलन गॉड'
सत्यम श्रीवास्तव की नई किताब 'द फॉलन गॉड' भारतीय पौराणिक कथाओं को एक अनोखे दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह किताब 'देव-असुर कथा ट्रिलॉजी' का दूसरा भाग है, जिसमें ध्रुव-लोक नामक काल्पनिक दुनिया में सत्ता, युद्ध और आस्था के बीच संघर्ष को दर्शाया गया है। कहानी का नायक लक्ष्य, जो भगवान शिव के त्रिशूल का धारक बनता है, के माध्यम से पाठक को मानसिक दुविधाओं और नैतिक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। जानें इस किताब की विशेषताओं और इसके लेखक के दृष्टिकोण के बारे में।
| May 29, 2026, 19:26 IST
सत्यम श्रीवास्तव की नई किताब
भारतीय पौराणिक कथाओं को एक अनोखे तरीके से प्रस्तुत करने वाली सत्यम श्रीवास्तव की किताब ‘द फॉलन गॉड’ तेजी से चर्चा का विषय बन रही है। यह पुस्तक उनकी ‘देव-असुर कथा ट्रिलॉजी’ का दूसरा भाग है, जो पहली किताब ‘द वील्डर ऑफ द त्रिशूल’ की कहानी को आगे बढ़ाती है। यह केवल एक अगला अध्याय नहीं है, बल्कि एक विशाल फैंटेसी संसार का विस्तार है, जहां सत्ता, युद्ध और आस्था के बीच टकराव देखने को मिलता है।
कहानी एक काल्पनिक दुनिया ध्रुव-लोक में स्थापित है, जहां पौराणिक तत्वों को पारंपरिक धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राजनीतिक और संघर्ष के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। यहां राज्यों का पतन, गठबंधनों का परिवर्तन और दिव्य अस्त्रों का उपयोग केवल पूजा के लिए नहीं, बल्कि शक्ति और विनाश के प्रतीक के रूप में किया जाता है। यही कारण है कि इस किताब की दुनिया हमेशा अस्थिर और रहस्यमयी बनी रहती है।
कहानी का नायक लक्ष्य है, जो शुरुआत में एक साधारण सैनिक होता है। उसकी जिंदगी में बदलाव तब आता है जब वह भगवान शिव के त्रिशूल का धारक बनता है। यह शक्ति उसके लिए सम्मान से अधिक समस्याएं लेकर आती है। उसकी उपस्थिति से राज्यों के बीच तनाव बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे पूरा ध्रुव-लोक युद्ध के कगार पर पहुंच जाता है। हर निर्णय बड़े परिणामों की ओर ले जाता है, जिससे पाठक हमेशा रोमांचित रहते हैं।
किताब में वृत्र के उदय और देव-असुर संघर्ष को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल युद्ध की कहानी नहीं है। लेखक ने पात्रों की मानसिक दुविधाओं, नैतिक संघर्षों और कर्तव्य के सवालों को भी गहराई से दर्शाया है। यहां कोई भी पूरी तरह सही या गलत नहीं है, और यही बात कहानी को और अधिक वास्तविक और प्रभावशाली बनाती है।
आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और भारतीय राजस्व सेवा में कार्यरत सत्यम श्रीवास्तव उन नए भारतीय लेखकों में से एक हैं, जो भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक फैंटेसी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। ‘द फॉलन गॉड’ के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया है कि भारतीय मिथकों पर आधारित कहानियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की फैंटेसी दुनिया का निर्माण कर सकती हैं। यह किताब पौराणिक कथाओं को पुनः प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें नए दृष्टिकोण से देखने और समझने का प्रयास करती है।
